संसद में एआई हो उत्तरदायी, संदर्भपूर्ण और मानवीय निर्णय से निर्देशित: उपसभापति हरिवंश

 संसद में एआई हो उत्तरदायी, संदर्भपूर्ण और मानवीय निर्णय से निर्देशित: उपसभापति हरिवंश

नई दिल्ली | 15 जनवरी 2026
राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने संसदीय व्यवस्थाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उत्तरदायी उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि संसद में एआई का प्रयोग संदर्भपूर्ण, विश्वसनीय और मानवीय निर्णय से निर्देशित होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को अपनाने की प्रक्रिया में मानव संस्थागत ज्ञान की केंद्रीय भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हरिवंश नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) के अंतर्गत संसद में एआई को अपनाने विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संसद में विकसित किए जा रहे विभिन्न डिजिटल एवं एआई आधारित उपकरणों की जानकारी साझा की, जो संसद के कुशल और प्रभावी कार्य संचालन में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
उन्होंने एआई के विकास के लिए हाइब्रिड दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि संसदीय ज्ञान दशकों की चर्चाओं, निर्णयों, परंपराओं और संवैधानिक प्रथाओं से निर्मित होता है, जिसे एआई प्रणालियों में समाहित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जवाबदेह एआई के विकास में मानवीय निगरानी और हस्तक्षेप व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।
संसद में एआई के व्यावहारिक उपयोगों का उल्लेख करते हुए उपसभापति ने बताया कि आधिकारिक दस्तावेजों के अनुवाद, संसदीय चर्चाओं के विश्लेषण तथा 22 भाषाओं में प्रश्न तैयार करने के लिए एआई का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 48,000 शब्दों वाला संसदीय भाषा शब्दकोश कस्टम एआई मॉडल में एकीकृत किया गया है, जिससे सटीकता बढ़ी है और उपयोगकर्ताओं में इसकी स्वीकार्यता मजबूत हुई है। उन्होंने दोहराया कि मानव अनुवादक पूर्ण नियंत्रण में रहते हैं और एआई एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य करता है।
अपने संबोधन के अंत में हरिवंश ने कहा कि विधायी संदर्भ में एआई का उपयोग सत्यनिष्ठ, नैतिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए तथा राष्ट्रमंडल देशों के बीच संसदीय एआई सहयोग को और सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि भारत चौथी बार इस दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले यह सम्मेलन 1971, 1986 और 2010 में भारत में आयोजित हो चुका है। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में संसद के सेंट्रल हॉल (संविधान सदन) में किया गया।