जलवायु संकट से फसलों पर कीटों का हमला बढा, किसानों पर आफत

 जलवायु संकट से फसलों पर कीटों का हमला बढा, किसानों पर आफत

नई दिल्ली। बढ़ता तापमान अब फसलों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन से कीट-घुन का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे गेहूं, धान और मक्का की पैदावार को भारी नुकसान हो सकता है। धरती का बढ़ता तापमान अब सिर्फ मौसम का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि खेती और खाने की थाली तक सीधा खतरा बनता जा रहा है। जलवायु संकट के साथ खेतों में कीटों और घुन का हमला तेजी से बढ़ा है। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर तापमान यूं ही बढ़ता रहा, तो गेहूं, धान, मक्का और सब्जियों की पैदावार पर भारी असर पड़ेगा और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक टीम के अध्ययन के मुताबिक, तापमान बढ़ने से कीटों को पनपने का ज्यादा मौका मिल रहा है। गर्मी के कारण कीट तेजी से विकसित हो रहे हैं। साल में अधिक बार प्रजनन कर पा रहे हैं। फसलों पर लंबे समय तक हमला कर रहे हैं। शोध में बताया गया है कि यदि वैश्विक तापमान औद्योगिक-पूर्व स्तर से दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो फसलों को होने वाला नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।

मुख्य फसलों पर कितना खतरा?

वैज्ञानिकों के अनुमान बेहद चिंताजनक हैं। गेहूं की पैदावार को कीटों से होने वाला नुकसान 46 फीसदी तक बढ़ सकता है। धान में यह बढ़ोतरी करीब 19 फीसदी हो सकती है। मक्का में कीटों से नुकसान 31 फीसदी तक पहुंचने का अंदेशा है। यही नहीं, अब सब्जियों की फसलों में भी इसका असर साफ दिखने लगा है।

आज दुनिया में हालात क्या हैं?

दुनिया की करीब 40 फीसदी फसलें किसी न किसी स्तर पर कीटों और पौधों की बीमारियों से प्रभावित हैं।

खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार, पौधों के रोगों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हर साल करीब 22,000 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है। आक्रामक प्रजातियों के कीट लगभग 7,000 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे जैव विविधता पर भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

कौन-कौन से कीट तेजी से फैल रहे हैं?

वैज्ञानिक साक्ष्यों की समीक्षा में सामने आया है कि कई खतरनाक कीट तेजी से फैल रहे हैं। माहू यानी एफिड्स, प्लांटहॉपर्स, तना भेदक, इल्ली और टिड्डियां भी इन्हीं कीटों में शामिल हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई कीट अब कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोध भी विकसित कर चुके हैं, जिससे इन्हें नियंत्रित करना और मुश्किल हो गया है।