संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 12 विधेयकों को दोनों सदनों की मंजूरी

 संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 12 विधेयकों को दोनों सदनों की मंजूरी

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026। संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 20 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र के दौरान 25 दिनों में कुल 19 बैठकें हुईं। सत्र में लोकसभा में 11 और राज्यसभा में 2 विधेयक पुरःस्थापित किए गए, जबकि दोनों सदनों ने कुल 12 विधेयकों को पारित किया।

मानसून सत्र के दौरान सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधायी बदलावों को आगे बढ़ाया। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 दोनों सदनों से पारित हुआ और राष्ट्रपति की मंजूरी भी प्राप्त कर चुका है। इसका उद्देश्य प्रतियोगी एवं सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर प्रभावी रोक लगाने के साथ जांच और ट्रायल की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है। विधेयक में जांच दो महीने और ट्रायल तीन महीने के भीतर पूरा करने, विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट तथा विशेष लोक अभियोजक की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

सत्र में राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पारित किया गया, जिसके जरिए ‘वंदे मातरम’ को कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालने या किसी को इसे गाने से रोकने को अपराध के दायरे में लाने का प्रस्ताव है।

इसी क्रम में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए देर से जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों को अधिक सख्त और सत्यापन आधारित बनाया गया है। वहीं MSME विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल पंजीकरण प्लेटफॉर्म, वित्त तक बेहतर पहुंच और विलंबित भुगतान से जुड़े विवादों के त्वरित समाधान पर जोर दिया गया है।

संसद ने बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी, जिसमें बैंक रिकॉर्ड की परिभाषा को आधुनिक तकनीक के अनुरूप विस्तारित करते हुए भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड आधारित रिकॉर्ड को शामिल किया गया है। केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 में राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, अधिकरण सुधार विधेयक तथा खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। अधिकरण सुधार विधेयक का उद्देश्य अधिकरणों में नियुक्ति, सेवा शर्तों, प्रशासन और कामकाज में सुधार के साथ पारदर्शिता एवं एकरूपता बढ़ाना है। वहीं खनिज क्षेत्र से जुड़े संशोधन का लक्ष्य वित्तीय स्थिरता और पूर्वानुमेयता सुनिश्चित कर आर्थिक विकास को गति देना है।

सत्र के दौरान राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन अध्यादेश और आय-कर (संशोधन) अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने वाले विधेयकों पर भी दोनों सदनों ने विचार कर उन्हें पारित किया। विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को जांच और रिपोर्ट के लिए दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया।

सत्र के दौरान वर्ष 2022-23 की अतिरिक्त अनुदान मांगों पर भी विचार किया गया। इससे संबंधित विनियोग विधेयक 4 अगस्त को लोकसभा में पुरःस्थापित और पारित हुआ तथा 6 अगस्त को राज्यसभा ने इसे लौटा दिया।

संसदीय कार्य के दौरान लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की उत्पादकता लगभग 39 प्रतिशत रही। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मानसून सत्र में दोनों सदनों से पारित 12 विधेयकों के जरिए परीक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय गौरव, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, MSME, बैंकिंग, सहकारिता, अधिकरण और खनिज क्षेत्र सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कानूनी बदलावों का रास्ता साफ हुआ।http://Politicaltrust.in