कुत्ते को छेड़ा तो पड़ सकता है भारी, अरबिंदो कॉलेज के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक से सिखाया ‘पॉज़ एंड प्रोटेक्ट’ का पाठ
नई दिल्ली- कुत्तों के काटने की घटनाओं से बचाव के लिए डर नहीं, बल्कि जागरूकता और समझदारी जरूरी है। इसी संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध श्री अरबिंदो कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई ने मंगलवार को ‘पॉज़ एंड प्रोटेक्ट’ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में एनएसएस स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को कुत्तों के व्यवहार को समझने और उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने के साथ-साथ पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत चार अंकों के नुक्कड़ नाटक में रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी परिस्थितियों को प्रभावी ढंग से दिखाया गया। पहले अंक में भोजन करते कुत्ते के पास जाने और उसे परेशान करने की स्थिति दिखाई गई। छात्रों ने बताया कि भोजन करते समय कुत्ते को छेड़ना या उसके बहुत करीब जाना उसके आक्रामक होने का कारण बन सकता है।

दूसरे अंक में शांत और मित्रवत दिखाई देने वाले कुत्ते के पास जाने की स्थिति प्रस्तुत की गई। इसके जरिए लोगों को समझाया गया कि कुत्ता शांत नजर आ रहा हो, तब भी उसके व्यक्तिगत स्थान का सम्मान करना चाहिए और बिना सावधानी के उसके पास नहीं जाना चाहिए।
नाटक के तीसरे अंक में कुछ स्कूली छात्राओं द्वारा कुत्ते को चिढ़ाने, डराने और दौड़ाने की स्थिति दिखाई गई। स्वयंसेवकों ने संदेश दिया कि कुत्तों को उकसाने या परेशान करने से वे भयभीत अथवा आक्रामक हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में काटने की घटना हो सकती है।
अंतिम अंक में पशुओं के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का संदेश दिया गया। स्वयंसेवकों ने लोगों से अपील की कि अपनी सुरक्षा के साथ-साथ पशुओं के प्रति भी मानवीय व्यवहार अपनाएं तथा किसी आपात स्थिति में उचित सहायता लेने और संबंधित हेल्पलाइन की जानकारी रखने को प्राथमिकता दें।

कॉलेज के मीडिया संयोजक प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि “कुत्तों के साथ भी मानवीय व्यवहार करें, वे भी समाज से प्यार चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि कुत्तों के व्यवहार को समझना और उनके साथ उचित तरीके से पेश आना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब पशुओं के साथ क्रूरता या गलत व्यवहार किया जाता है तो कई बार वे भय या तनाव के कारण आक्रामक हो जाते हैं। इसलिए लोगों को कुत्तों से बचाव के साथ-साथ उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार की जानकारी भी होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि एनएसएस टीम द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक के जरिए कुत्तों के काटने से बचाव के महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहद सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों में यह समझ विकसित करना था कि सावधानी और सही व्यवहार के जरिए मानव-पशु संघर्ष की स्थिति को कम किया जा सकता है।
एनएसएस कार्यक्रम संयोजिका आकृति सैनी ने कहा कि कॉलेज समय-समय पर नुक्कड़ नाटक, कार्यशालाओं, रैलियों और भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक करता है। उन्होंने कहा कि ‘पॉज़ एंड प्रोटेक्ट’ के माध्यम से स्वयंसेवकों ने यह संदेश दिया कि कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए भय फैलाने के बजाय जागरूकता, सावधानी, संवेदनशीलता और जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना जरूरी है।
कार्यक्रम के लिए एनएसएस इकाई ने कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. अरुण चौधरी के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। आयोजन का संचालन एनएसएस समिति के मुख्य दल अध्यक्ष शिवम चौहान, उपाध्यक्ष शशिकांत कुमार, सचिव प्रिया पांडे, कोषाध्यक्ष दीपांशु और परियोजना समन्वयक कुलसूम के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम की सफलता में एनएसएस स्वयंसेवकों और पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रो. हंसराज सुमन ने कहा कि श्री अरबिंदो कॉलेज विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ पाठ्य सहगामी गतिविधियों के जरिए व्यावहारिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने पर भी जोर देता है। ‘पॉज़ एंड प्रोटेक्ट’ कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों ने कुत्तों से सुरक्षित व्यवहार और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता का संदेश प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाया।http://Politicaltrust.in
