• July 19, 2026

भारत की पहली समुद्र के नीचे रेल सुरंग का निर्माण शुरू, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने रचा नया इतिहास

 भारत की पहली समुद्र के नीचे रेल सुरंग का निर्माण शुरू, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने रचा नया इतिहास

मुंबई– मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना के तहत महाराष्ट्र में ठाणे क्रीक के नीचे बनने वाली भारत की पहली समुद्र के नीचे रेल सुरंग की खुदाई का कार्य दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) से शुरू हो गया है। यह देश के बुनियादी ढांचे और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
परियोजना के तहत सावली (घंसोली) से विक्रोली तक 10 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है, जिसमें लगभग 7 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के नीचे ठाणे क्रीक से होकर गुजरेगा। मुंबई और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के बीच कुल 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत सेक्शन में से 16 किलोमीटर का निर्माण अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों से किया जाएगा, जबकि शेष 5 किलोमीटर का निर्माण पहले ही न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) से पूरा किया जा चुका है। पहली टीबीएम ने 5 जुलाई 2026 को विक्रोली से बीकेसी की ओर खुदाई शुरू कर दी थी।
इस परियोजना में उपयोग की जा रही टीबीएम भारत में रेल सुरंग निर्माण के लिए अब तक की सबसे बड़ी मशीनों में से एक है। इसका कटरहेड 13.6 मीटर व्यास का है, कुल वजन लगभग 3,200 टन और लंबाई 96 मीटर है। मिक्सशील्ड तकनीक पर आधारित यह स्लरी-बेस्ड सेमी-ऑटोमैटिक मशीन कठिन भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों में सुरक्षित और सटीक खुदाई करने में सक्षम है।
मुंबई के घनी आबादी वाले क्षेत्र में सतह पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए इस परियोजना में मिक्सशील्ड तकनीक अपनाई गई है। मशीन में एडवांस्ड सेमी-कंटीन्यूअस एडवांस सिस्टम लगाया गया है, जिससे सुरंग की खुदाई और रिंग निर्माण का कार्य एक साथ सुरक्षित रूप से किया जा सकता है, जिससे निर्माण की गति बढ़ेगी।

टीबीएम को लॉन्च करने के लिए सावली में 39 मीटर गहरा शाफ्ट तैयार किया गया है। सीमित स्थान के कारण मशीन को अलग-अलग हिस्सों में नीचे उतारकर दोबारा जोड़ा गया। इस प्रक्रिया में पहले गैंट्री और फिर मुख्य शील्ड एवं कटरहेड को स्थापित किया गया।
परियोजना में अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था भी शामिल की गई है। टीबीएम में मल्टी-गैस रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन और फायर सप्रेशन सिस्टम, इमरजेंसी रिफ्यूज चैंबर तथा वॉटर कर्टेन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा सुरंग निर्माण के दौरान आसपास की इमारतों और जमीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, सेटलमेंट सेंसर, टिल्ट मीटर, स्ट्रेन गेज और सीस्मोग्राफ जैसे उपकरण लगाए गए हैं।

सुरंग को पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाने के लिए डबल-लेयर ईपीडीएम गैस्केट और हाइड्रोफिलिक सील का उपयोग किया जा रहा है, जिससे समुद्र के पानी का प्रवेश रोका जा सके और सुरंग की दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित हो।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत समुद्र के नीचे बनने वाली यह सुरंग भारत के इंजीनियरिंग कौशल और आधुनिक तकनीकी क्षमता का प्रतीक मानी जा रही है। इसके पूरा होने से देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विकास को नई गति मिलेगी।http://Politicaltrust.in