79,459 करोड़ रुपये की HPCL राजस्थान रिफाइनरी का व्यावसायिक संचालन शुरू, भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बड़ा बल
Nimmi Thakur
नई दिल्ली/बालोतरा। भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) ने 22 जून 2026 से अपना व्यावसायिक संचालन (Commercial Operation) शुरू कर दिया है। लगभग 79,459 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह परियोजना देश की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात में कमी आएगी और राजस्थान में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
HPCL और राजस्थान सरकार की संयुक्त भागीदारी से विकसित इस परियोजना में HPCL की 74 प्रतिशत तथा राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। रिफाइनरी की वार्षिक रिफाइनिंग क्षमता 90 लाख टन और पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता 24 लाख टन है। यह देश की पहली ऐसी ग्रीनफील्ड परियोजना है, जिसमें रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को एक साथ विकसित किया गया है।
रिफाइनरी में 12 जून 2026 से कच्चे तेल का प्रसंस्करण शुरू हो चुका है। यहां से BS-VI गुणवत्ता का डीजल, पेट्रोल, एलपीजी और पेट-कोक का उत्पादन एवं व्यावसायिक आपूर्ति शुरू हो गई है। हालांकि कुछ इकाइयों का कमीशनिंग कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन मुख्य रिफाइनिंग गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह ने भी 22 जून 2026 को रिफाइनरी की आधिकारिक व्यावसायिक संचालन तिथि (DCCO) के रूप में स्वीकार कर लिया है।
तकनीकी दृष्टि से HRRL दुनिया की सबसे आधुनिक रिफाइनरियों में शामिल होगी। इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (17.0) वैश्विक औसत से कहीं अधिक है, जबकि 26 प्रतिशत पेट्रोकेमिकल इंटेंसिटी इंडेक्स भारत में सबसे अधिक है। यहां पेट्रोल और डीजल के अलावा पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएथिलीन, बेंजीन, टोल्यून और ब्यूटाडीन जैसे उच्च मूल्य वाले पेट्रोकेमिकल उत्पादों का भी उत्पादन होगा, जिससे देश की आयात निर्भरता कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी।
इस परियोजना का निर्माण भी अपने आप में एक इंजीनियरिंग उपलब्धि है। रिफाइनरी के निर्माण में करीब 3 लाख मीट्रिक टन स्टील, 16 लाख घनमीटर कंक्रीट, 28 हजार किलोमीटर केबल, 800 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क तथा अत्याधुनिक भंडारण और परिवहन सुविधाएं विकसित की गई हैं। परियोजना के निर्माण के दौरान 40.6 करोड़ सुरक्षित मानव-घंटों (Safe Man-hours) का रिकॉर्ड भी बनाया गया।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए रिफाइनरी को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली पर विकसित किया गया है, जिससे संयंत्र से कोई तरल अपशिष्ट बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। परिसर में अब तक 1.25 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं और हरित क्षेत्र को और बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जा रहा है। इसके साथ ही सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है।
रिफाइनरी ने आसपास के क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया है। अस्पताल, स्कूल, सड़क, जल संरक्षण, चिकित्सा शिविर और कौशल विकास जैसी सामाजिक परियोजनाओं पर 107.82 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। स्थानीय युवाओं के लिए आईटीआई, पॉलिटेक्निक और स्किल डेवलपमेंट सेंटर को भी आधुनिक बनाया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
ऐसे समय में जब दुनिया के कई देशों में रिफाइनरियां बंद हो रही हैं या उनकी क्षमता घटाई जा रही है, HPCL राजस्थान रिफाइनरी का संचालन शुरू होना भारत के लिए बड़ी रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह परियोजना न केवल देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में एक मजबूत और भरोसेमंद केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
