भारत-जापान ने ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ाया सहयोग, रणनीतिक तेल भंडारण से लेकर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तक मिलकर करेंगे काम

 भारत-जापान ने ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ाया सहयोग, रणनीतिक तेल भंडारण से लेकर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तक मिलकर करेंगे काम

Nimmi Thakur 
नई दिल्ली-भारत और जापान ने ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा लचीलेपन (Energy Resilience) को नई मजबूती देने के लिए रणनीतिक तेल भंडारण, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री परिवहन और वैश्विक ऊर्जा बाजार में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सानाए की नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में लिया गया।
भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय (METI) के बीच हुए इस संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देश कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के रणनीतिक भंडारण से जुड़े अनुभव साझा करेंगे। साथ ही राष्ट्रीय भंडारण प्रणाली, उद्योग आधारित भंडारण, तेल उत्पादक देशों के साथ समन्वय, आपातकालीन प्रतिक्रिया और ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने के उपायों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा।
दोनों देशों ने ऊर्जा उपभोक्ता देशों की भूमिका को मजबूत करने पर भी जोर दिया। इसके तहत वैश्विक तेल एवं गैस बाजार के रुझानों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान, बाजार में उतार-चढ़ाव कम करने के लिए संयुक्त प्रयास, तीसरे देशों से ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प तलाशना तथा तेल एवं गैस के अपस्ट्रीम क्षेत्र में संयुक्त निवेश की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।
संयुक्त बयान में तेल और गैस के समुद्री परिवहन को ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए इसे अधिक सुरक्षित, आत्मनिर्भर और कुशल बनाने पर सहमति व्यक्त की गई। दोनों देश समुद्री ऊर्जा परिवहन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त निवेश के अवसर भी तलाशेंगे।
संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की राष्ट्रीय तेल कंपनियों, इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) तथा जापान की JOGMEC और JBIC सहित संबंधित संस्थानों के बीच तकनीकी और वित्तीय सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
दोनों देशों ने इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए भारत-जापान ऊर्जा संवाद के तहत गठित भारत-जापान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) के माध्यम से नियमित बैठकें आयोजित करने और सहयोग की प्रगति की समीक्षा करने का निर्णय भी लिया।
यह पहल ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत और जापान के बीच यह सहयोग एशिया में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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