तीन दशक में पहली बार कुवैत ने अप्रैल में तेल का निर्यात नहीं किया

 तीन दशक में पहली बार कुवैत ने अप्रैल में तेल का निर्यात नहीं किया
कुवैत। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल माह में कुवैत ने तेल का निर्यात नहीं किया है। तीन दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब कुवैत ने किसी माह में तेल निर्यात नहीं किया। इससे पहले खाड़ी युद्ध के समय ऐसा हुआ था। टैंकर ट्रैकर वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। पश्चिम एशिया संकट के चलते ऐसा हुआ है और पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित है। इसका असर तेल निर्यातक देशों पर भी पड़ रहा है।
वैश्विक तेल शिपमेंट पर नजर रखने वाले टैंकर ट्रैकर ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, ‘ब्रेकिंग, अप्रैल 2026 के दौरान कुवैत ने एक भी बैरल तेल का निर्यात नहीं किया। खाड़ी युद्ध की समाप्ति के बाद पहली बार ऐसा हुआ है।’ रिपोर्ट में बताया गया है कि कुवैत में तेल उत्पादन जारी है, लेकिन कच्चे तेल का निर्यात लगभग पूरी तरह से रुक गया है। कुवैत निकाले जा रहे तेल का कुछ हिस्सा भंडारण में रख रहा है और कुछ हिस्से को रिफाइन करके पेट्रोलियम उत्पाद बनाए जा रहे हैं।
ईरान का एक सुपरटैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंच गया है। मॉनिटरिंग फर्म ‘टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम’ के अनुसार, जहाज लगभग 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर वहां से निकल गया। इसकी कीमत करीब 22 करोड़ डॉलर आंकी गई है।
यह वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (वीएलसीसी) नेशनल इरानियन टैंकर कंपनी का बताया जा रहा है, जिसे ‘ह्यूज’ नाम से जाना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसे आखिरी बार डेढ़ हफ्ते पहले श्रीलंका के पास देखा गया था। फिलहाल यह जहाज लोमबोक स्ट्रेट से गुजरते हुए रिओ आर्किपेलेगो (द्वीप समूह) की ओर बढ़ रहा है। 13 अप्रैल को जब अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा की, उस समय यह टैंकर ईरानी जलक्षेत्र में था। इससे पहले 20 मार्च को स्ट्रेट ऑफ मलाका से ईरान के लिए रवाना होने के बाद से इसने अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) को बंद कर दिया था, जिससे इसकी लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो गया था।