अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गंभीर मोड़ पर, ट्रम्प ने अपनाया सख्त रूख
- दिल्ली राष्ट्रीय विदेश
Political Trust
- May 3, 2026
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वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि “पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं दिए जा सकते।” उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, क्योंकि इससे इजराइल, मध्य-पूर्व और यूरोप तक खतरे में पड़ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई कर वैश्विक सुरक्षा को एक बड़े खतरे से बचाया है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान लगातार बातचीत का प्रस्ताव दे रहा है, लेकिन उनके अनुसार ये प्रस्ताव अधूरे हैं क्योंकि इनमें परमाणु मुद्दे का स्पष्ट समाधान शामिल नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान ने हालिया प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम का जिक्र नहीं किया, जिससे ट्रम्प प्रशासन असंतुष्ट है।
उधर ईरान का रुख भी सख्त दिखाई दे रहा है। तेहरान ने कहा है कि पहले होर्मुज स्ट्रेट और आर्थिक प्रतिबंधों पर चर्चा होनी चाहिए, जबकि अमेरिका चाहता है कि परमाणु और आर्थिक मुद्दों पर एक साथ बातचीत हो।
स्थिति और तनावपूर्ण तब हो गई जब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने दावा किया कि ईरान ने युद्धविराम के बावजूद परमाणु गतिविधियों पर पूरी तरह स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। वहीं अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी देश या कंपनियां ईरान को आर्थिक सहयोग देंगी, उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां प्रतिदिन करीब 130 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या 10 से भी कम हो गई है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार पर असर पड़ रहा है।
इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित सैन्य टकराव की आशंका भी बढ़ गई है। ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि हालात फिर बिगड़ सकते हैं और किसी भी हमले का जवाब देने के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान लगातार बातचीत का प्रस्ताव दे रहा है, लेकिन उनके अनुसार ये प्रस्ताव अधूरे हैं क्योंकि इनमें परमाणु मुद्दे का स्पष्ट समाधान शामिल नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान ने हालिया प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम का जिक्र नहीं किया, जिससे ट्रम्प प्रशासन असंतुष्ट है।
उधर ईरान का रुख भी सख्त दिखाई दे रहा है। तेहरान ने कहा है कि पहले होर्मुज स्ट्रेट और आर्थिक प्रतिबंधों पर चर्चा होनी चाहिए, जबकि अमेरिका चाहता है कि परमाणु और आर्थिक मुद्दों पर एक साथ बातचीत हो।
स्थिति और तनावपूर्ण तब हो गई जब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने दावा किया कि ईरान ने युद्धविराम के बावजूद परमाणु गतिविधियों पर पूरी तरह स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। वहीं अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी देश या कंपनियां ईरान को आर्थिक सहयोग देंगी, उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां प्रतिदिन करीब 130 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या 10 से भी कम हो गई है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार पर असर पड़ रहा है।
इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित सैन्य टकराव की आशंका भी बढ़ गई है। ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि हालात फिर बिगड़ सकते हैं और किसी भी हमले का जवाब देने के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं।
