कस्टम विभाग ने ‘ऑपरेशन नुमखोर’ के तहत लग्जरी कार तस्करी घोटाले का पर्दाफाश किया
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- April 22, 2026
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Political Trust Magazine
नई दिल्ली। भारतीय सीमा शुल्क विभाग ने ‘ऑपरेशन नुमखोर’ के तहत देश के अब तक के सबसे बड़े लग्जरी कार तस्करी घोटाले का पर्दाफाश किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि भूटान सीमा का फायदा उठाकर करीब 15,849 लग्जरी वाहनों को अवैध रूप से भारतीय सड़कों पर उतारा गया। इस संगठित रैकेट ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे न केवल सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दिया, बल्कि सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ रुपये की चपत भी लगाई है।
35 कारों से शुरू हुई जांच
सूत्रों के अनुसार, इस महाघोटाले की शुरुआत केरल में महज 35-40 संदिग्ध लग्जरी कारों की जांच से हुई थी। लेकिन जब अधिकारियों ने कड़ियां जोड़ीं, तो ‘नेशनल व्हीकल रजिस्ट्री’ के डिजिटल ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। देखते ही देखते संदिग्ध वाहनों की संख्या बढ़कर 15,849 हो गई। जिससे स्पष्ट हो गया कि यह कोई छिटपुट अपराध नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का काम है। इस खुलासे से केरल से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है।
फर्जी कागजातों का ‘मास्टरमाइंड’ खेल
तस्करों ने टैक्स बचाने और पंजीकरण कराने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए गये, जिनमें सेना के फर्जी सर्टिफिकेट के खेल में कई नई लग्जरी कारों को भारतीय सेना की ‘पुरानी डिस्पोजल गाड़ियां’ बताकर रजिस्टर कराया गया। यही नहीं कुछ हाई-एंड कारों के लिए विदेशी दूतावासों और विदेश मंत्रालय के जाली एनओसी (NOC) तैयार किए गए, ताकि 100% से अधिक लगने वाली कस्टम ड्यूटी को शून्य किया जा सके। अकेले असम में 464 वाहनों का फर्जी पंजीकरण पाया गया है, जबकि केरल में अब तक 50 से अधिक गाड़ियां जब्त की जा चुकी हैं।
सफेदपोश और फिल्मी सितारों पर कसता शिकंजा
जांच की आंच अब मनोरंजन जगत और रसूखदार लोगों तक पहुँच गई है। सूत्रों के मुताबिक, कई फिल्मी सितारों और मशहूर हस्तियों ने सस्ती कीमत के लालच में इन तस्करी वाली गाड़ियों को खरीदा। हालांकि विभाग ने अभी नामों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इन सभी को नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है।
भारत-भूटान अधिकारियों की बैठक
इस तस्करी नेटवर्क को जड़ से मिटाने के लिए भारत और भूटान के सीमा शुल्क अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक केरल के मुन्नार में आयोजित की गई है। इस बैठक में सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने, डिजिटल डेटा साझा करने और अवैध रूप से बेची गई SUV एवं लग्जरी गाड़ियों को रिकवर करने की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल ऑडिट के जरिए अब एक-एक वाहन की कुंडली खंगाली जा रही है और आने वाले दिनों में देश भर में बड़े स्तर पर धरपकड़ संभव है।
35 कारों से शुरू हुई जांच
सूत्रों के अनुसार, इस महाघोटाले की शुरुआत केरल में महज 35-40 संदिग्ध लग्जरी कारों की जांच से हुई थी। लेकिन जब अधिकारियों ने कड़ियां जोड़ीं, तो ‘नेशनल व्हीकल रजिस्ट्री’ के डिजिटल ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। देखते ही देखते संदिग्ध वाहनों की संख्या बढ़कर 15,849 हो गई। जिससे स्पष्ट हो गया कि यह कोई छिटपुट अपराध नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का काम है। इस खुलासे से केरल से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है।
फर्जी कागजातों का ‘मास्टरमाइंड’ खेल
तस्करों ने टैक्स बचाने और पंजीकरण कराने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए गये, जिनमें सेना के फर्जी सर्टिफिकेट के खेल में कई नई लग्जरी कारों को भारतीय सेना की ‘पुरानी डिस्पोजल गाड़ियां’ बताकर रजिस्टर कराया गया। यही नहीं कुछ हाई-एंड कारों के लिए विदेशी दूतावासों और विदेश मंत्रालय के जाली एनओसी (NOC) तैयार किए गए, ताकि 100% से अधिक लगने वाली कस्टम ड्यूटी को शून्य किया जा सके। अकेले असम में 464 वाहनों का फर्जी पंजीकरण पाया गया है, जबकि केरल में अब तक 50 से अधिक गाड़ियां जब्त की जा चुकी हैं।
सफेदपोश और फिल्मी सितारों पर कसता शिकंजा
जांच की आंच अब मनोरंजन जगत और रसूखदार लोगों तक पहुँच गई है। सूत्रों के मुताबिक, कई फिल्मी सितारों और मशहूर हस्तियों ने सस्ती कीमत के लालच में इन तस्करी वाली गाड़ियों को खरीदा। हालांकि विभाग ने अभी नामों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इन सभी को नोटिस भेजने की तैयारी चल रही है।
भारत-भूटान अधिकारियों की बैठक
इस तस्करी नेटवर्क को जड़ से मिटाने के लिए भारत और भूटान के सीमा शुल्क अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक केरल के मुन्नार में आयोजित की गई है। इस बैठक में सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने, डिजिटल डेटा साझा करने और अवैध रूप से बेची गई SUV एवं लग्जरी गाड़ियों को रिकवर करने की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल ऑडिट के जरिए अब एक-एक वाहन की कुंडली खंगाली जा रही है और आने वाले दिनों में देश भर में बड़े स्तर पर धरपकड़ संभव है।
