परिसीमन प्रस्ताव पर संसद में टकराव तय, महिला आरक्षण के साथ सीटें बढ़ाने की तैयारी

 परिसीमन प्रस्ताव पर संसद में टकराव तय, महिला आरक्षण के साथ सीटें बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली। लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में बढ़ोतरी से जुड़े परिसीमन प्रस्ताव को लेकर संसद के विस्तारित सत्र की शुरुआत के साथ ही सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्र सरकार जहां इसे “समय की जरूरत” बता रही है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने कई बिंदुओं पर गंभीर आपत्ति जताई है।
सरकार आज (16 अप्रैल) लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश कर रही है, जिसके तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने का रास्ता साफ होगा। इसी प्रक्रिया के तहत महिला आरक्षण को भी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही परिसीमन विधेयक और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी सदन में रखे जाएंगे।
सरकार का कहना है कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि देश की आबादी में बड़ा इजाफा हुआ है। ऐसे में प्रतिनिधित्व को संतुलित करने के लिए नया परिसीमन जरूरी है। प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या 850 तक तय की जा सकती है और हर राज्य में सीटों में लगभग 50% तक वृद्धि का प्रावधान रखा गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य की सीटें घटाई नहीं जाएंगी।
हालांकि, विपक्ष खासकर दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को लेकर सरकार को घेर रहा है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उन्हें नए परिसीमन में नुकसान हो सकता है। विपक्ष की मांग है कि परिसीमन के लिए 2021 या आगामी जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाए और सभी राज्यों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।
सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी और हर राज्य के लिए अलग परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जो सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद अंतिम फैसला करेगा।
संसद का शेड्यूल:
16 अप्रैल: लोकसभा में विधेयकों पर करीब 18 घंटे चर्चा
17 अप्रैल: लोकसभा में मतदान
18 अप्रैल: राज्यसभा में पेश, करीब 10 घंटे चर्चा के बाद मतदान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे के साथ परिसीमन को जोड़ने से विपक्ष के लिए रणनीति बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में यह तीन दिन संसद के भीतर तीखी बहस और संभावित टकराव के संकेत दे रहे हैं।