गेहूं खरीद के नए नियमों में बदलाव, अब खराब फसल भी एसएमपी मूल्य पर
- कारोबार दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- April 14, 2026
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नई दिल्ली। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित गेहूं फसल को देखते हुए सरकार ने गेहूं खरीदी के मानकों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब खराब गुणवत्ता वाले गेहूं की भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी की जाएगी। जिससे किसानों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
बेमौसम बारिश से प्रभावित फसल
मार्च और अप्रैल के दौरान कई राज्यों में हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे दानों की चमक और गुणवत्ता पर असर पड़ा, जिसके चलते किसानों को नुकसान का डर सता रहा था।
किसानों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने गेहूं खरीदी के नियमों में बदलाव किया है। अब गेहूं के दानों की चमक में 50 प्रतिशत तक कमी होने पर भी खरीदी की जाएगी।
पहले जहां टूटे और सिकुड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत तक थी, अब इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दानों की सीमा भी निर्धारित की गई है, जिससे ज्यादा किसानों को फायदा मिलेगा।
गेहूं खरीदी के दौरान बाहरी तत्व, अन्य खाद्यान्न, टूटे दाने, सिकुड़े दाने और खराब गुणवत्ता जैसे कई मानकों पर जांच की जाती है। मौसम की मार के कारण इन मानकों में छूट देना जरूरी हो गया था।
खरीदी प्रक्रिया में चुनौतियां
हालांकि सरकार ने नियमों में ढील दी है, लेकिन खरीदी प्रक्रिया में अभी भी कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं। स्लॉट बुकिंग और भंडारण की कमी के कारण कई किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
खरीदी की सीमा भी तय
सरकार ने प्रति बीघा और प्रति हेक्टेयर खरीदी की सीमा भी तय की है। निर्धारित सीमा के अनुसार ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जाएगा, जिससे व्यवस्था को संतुलित रखा जा सके।
सरकार द्वारा गेहूं खरीदी के मानकों में दी गई छूट किसानों के लिए राहत भरी खबर है। इससे खराब मौसम से प्रभावित किसानों को नुकसान से बचने में मदद मिलेगी, हालांकि खरीदी प्रक्रिया को और आसान बनाने की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
मार्च और अप्रैल के दौरान कई राज्यों में हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे दानों की चमक और गुणवत्ता पर असर पड़ा, जिसके चलते किसानों को नुकसान का डर सता रहा था।
किसानों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने गेहूं खरीदी के नियमों में बदलाव किया है। अब गेहूं के दानों की चमक में 50 प्रतिशत तक कमी होने पर भी खरीदी की जाएगी।
पहले जहां टूटे और सिकुड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत तक थी, अब इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दानों की सीमा भी निर्धारित की गई है, जिससे ज्यादा किसानों को फायदा मिलेगा।
गेहूं खरीदी के दौरान बाहरी तत्व, अन्य खाद्यान्न, टूटे दाने, सिकुड़े दाने और खराब गुणवत्ता जैसे कई मानकों पर जांच की जाती है। मौसम की मार के कारण इन मानकों में छूट देना जरूरी हो गया था।
खरीदी प्रक्रिया में चुनौतियां
हालांकि सरकार ने नियमों में ढील दी है, लेकिन खरीदी प्रक्रिया में अभी भी कुछ समस्याएं सामने आ रही हैं। स्लॉट बुकिंग और भंडारण की कमी के कारण कई किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
खरीदी की सीमा भी तय
सरकार ने प्रति बीघा और प्रति हेक्टेयर खरीदी की सीमा भी तय की है। निर्धारित सीमा के अनुसार ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जाएगा, जिससे व्यवस्था को संतुलित रखा जा सके।
सरकार द्वारा गेहूं खरीदी के मानकों में दी गई छूट किसानों के लिए राहत भरी खबर है। इससे खराब मौसम से प्रभावित किसानों को नुकसान से बचने में मदद मिलेगी, हालांकि खरीदी प्रक्रिया को और आसान बनाने की जरूरत अभी भी बनी हुई है।
