भारतीय रेलवे ने की जीरो एक्सीडेंट के लक्ष्य की तैयारी, कवच से लैस होगा इंजन
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- April 10, 2026
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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे अब पटरियों को सिर्फ रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य के लिए तैयार कर रही है। रेल मंत्रालय की ओर से एक बड़ी घोषणा की गई है। रेलवे ने अपने पूरे नेटवर्क में सुरक्षा, सिग्नलिंग और संचार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 1,364.45 करोड़ रुपये के कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है।
यह कोई मामूली मरम्मत का काम नहीं है। यह भारतीय रेलवे का डिजिटल कायाकल्प है। इसमें स्वदेशी तकनीक ‘कवच’ का विस्तार, पुराने पड़ चुके पैनल इंटरलॉकिंग को हटाकर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाना और पूरे देश में ऑप्टिकल फाइबर केबल का जाल बिछाना शामिल है। रेलवे के इस नए प्लान से आपके सफर की तस्वीर बदलने वाली है। रेलवे की सबसे बड़ी प्राथमिकता ‘कवच’ सिस्टम है। यह एक ऐसी स्वदेशी तकनीक है जो दो ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकती है। अगर कोई लोको पायलट गलती से रेड सिग्नल पार कर देता है या ट्रेन की रफ्तार जरूरत से ज्यादा होती है, तो कवच खुद-ब-खुद ब्रेक लगा देता है।
इंजनों पर लगेगा कवच
ताजा मंजूरी में दक्षिणी रेलवे (Southern Railway) के 232 इंजनों पर कवच उपकरण लगाने के लिए 208.81 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह पूरा काम रेलवे के उस बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसका बजट ₹27,695 करोड़ है। इसका मकसद देश के बचे हुए तमाम रेल रूट पर कवच और हाई-स्पीड इंटरनेट (LTE) पहुंचाना है।
वर्जन 4.0 की एंट्री
दक्षिणी रेलवे के लिए कुल 2,950 करोड़ रुपये का अलग से फंड रखा गया है। इसके तहत अब इंजनों पर कवच का सबसे लेटेस्ट ‘वर्जन 4.0’ लगाया जाएगा।
इंजनों पर लगेगा कवच
ताजा मंजूरी में दक्षिणी रेलवे (Southern Railway) के 232 इंजनों पर कवच उपकरण लगाने के लिए 208.81 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह पूरा काम रेलवे के उस बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिसका बजट ₹27,695 करोड़ है। इसका मकसद देश के बचे हुए तमाम रेल रूट पर कवच और हाई-स्पीड इंटरनेट (LTE) पहुंचाना है।
वर्जन 4.0 की एंट्री
दक्षिणी रेलवे के लिए कुल 2,950 करोड़ रुपये का अलग से फंड रखा गया है। इसके तहत अब इंजनों पर कवच का सबसे लेटेस्ट ‘वर्जन 4.0’ लगाया जाएगा।
