कानपुर के किडनी रैकेट के खुलासे के बाद जड़ें खंगालने में जुटी पुलिस
- उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय
Political Trust
- March 31, 2026
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कानपुर। कानपुर के किडनी रैकेट के खुलासे के बाद क्राइम ब्रांच और पुलिस की टीमें इसकी जड़ें तक खंगालने में जुट गई हैं। टीम ने आरोपी शिवम को हिरासत में लेकर कई घंटों तक पूछताछ की। उसने पुलिस को बताया है कि कैसे किडनी खरीद का काला धंधा चलता है। आरोपी ने बताया कि शक न हो इसके लिए किडनी खरीदने वाले को अपना रिश्तेदार बताया जाता है। उसे गरीब और परिवार का एकमात्र सहारा बताकर कम से कम दाम में सौदा करने की कोशिश की जाती है। इसके बाद जरूरतमंद के परिजन को उसकी गिरती सेहत का हवाला देकर जल्द से जल्द किडनी का इंतजाम करने के लिए कहा जाता है। बाद में उसे एक डोनर के विषय में बताकर उसकी खर्च करने की हैसियत आकी जाती है। जरूरतमंद के परिजन के तैयार होने पर उसे कई गुना मुनाफा लेकर बेचा दिया जाता है।
कानपुर में अभी कई ऐसे अस्पताल
ऐसे में अब पुलिस उन अस्पतालों के बारे में जानकारी जुटा रही है जिनमें ट्रांसप्लांट किया गया, या इसके बाद मरीज और डोनर को भर्ती कर उनका उपचार किया गया। पुलिस की पूछताछ में यह भी बात सामने आई है कि सभी अस्पताल बर्रा, नौबस्ता, पनकी और कल्याणपुर जैसे क्षेत्रों में चल रहे हैं।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इन अस्पतालों में मरीज को गाल ब्लैडर, पथरी या आंतों का रोगी बताकर भर्ती किया जाता था। जहां डोनर को जल्द छुट्टी दे दी जाती। किडनी लेने वाले मरीज को कई माह तक भर्ती रखा जाता। हर अस्पताल में उसके बारे में नई बीमारी बताई जाती है।
आरोपी की जानकारी से पता चला है कि रैकेट में ट्रांसप्लांट मामले से जुड़े रहे कई डॉक्टर और नर्सिंग होम के नाम शामिल हैं। पुलिस की टीमें उसके बताए गए अस्पतालों और डॉक्टरों से पूछताछ कर सच्चाई जानने में जुट गई हैं। चर्चा है कि पुलिस की टीमें पश्चिम बंगाल और हरियाणा भी गई हैं।
बताया जा रहा है कि वहां के युवकों से भी किडनी की खरीद फरोख्त हुई है। मामले में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लाट के मामले में जितने भी नाम सामने आए हैं, सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।
ऐसे में अब पुलिस उन अस्पतालों के बारे में जानकारी जुटा रही है जिनमें ट्रांसप्लांट किया गया, या इसके बाद मरीज और डोनर को भर्ती कर उनका उपचार किया गया। पुलिस की पूछताछ में यह भी बात सामने आई है कि सभी अस्पताल बर्रा, नौबस्ता, पनकी और कल्याणपुर जैसे क्षेत्रों में चल रहे हैं।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इन अस्पतालों में मरीज को गाल ब्लैडर, पथरी या आंतों का रोगी बताकर भर्ती किया जाता था। जहां डोनर को जल्द छुट्टी दे दी जाती। किडनी लेने वाले मरीज को कई माह तक भर्ती रखा जाता। हर अस्पताल में उसके बारे में नई बीमारी बताई जाती है।
आरोपी की जानकारी से पता चला है कि रैकेट में ट्रांसप्लांट मामले से जुड़े रहे कई डॉक्टर और नर्सिंग होम के नाम शामिल हैं। पुलिस की टीमें उसके बताए गए अस्पतालों और डॉक्टरों से पूछताछ कर सच्चाई जानने में जुट गई हैं। चर्चा है कि पुलिस की टीमें पश्चिम बंगाल और हरियाणा भी गई हैं।
बताया जा रहा है कि वहां के युवकों से भी किडनी की खरीद फरोख्त हुई है। मामले में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लाट के मामले में जितने भी नाम सामने आए हैं, सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।
