मिडिल ईस्ट जंग का असर: होर्मुज में फंसे भारतीय जहाज, ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा खतरा

 मिडिल ईस्ट जंग का असर: होर्मुज में फंसे भारतीय जहाज, ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा खतरा
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सोमवार को सरकार ने एक बेहद चिंताजनक जानकारी साझा करते हुए बताया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में भारत के लिए जरूरी तेल और गैस लेकर आ रहे 28 जहाज फंस गए हैं। इनमें 18 भारतीय झंडे वाले और 10 विदेशी जहाज शामिल हैं। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने मौजूदा हालात को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार इन जहाजों और उन पर सवार 485 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सरकार ने एक बेहद चिंताजनक जानकारी साझा करते हुए बताया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में भारत के लिए जरूरी तेल और गैस लेकर आ रहे 28 जहाज फंस गए हैं। इनमें 18 भारतीय झंडे वाले और 10 विदेशी जहाज शामिल हैं। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने मौजूदा हालात को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार इन जहाजों और उन पर सवार 485 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।विशेष सचिव के अनुसार, फंसे हुए इन 28 जहाजों में से 10 विदेशी झंडे वाले पोत भारत की सबसे बड़ी जरूरतें लेकर आ रहे हैं। इनमें 3 जहाज एलपीजी (LPG), 4 कच्चा तेल (Crude Oil) और 3 एलएनजी (LNG) से लदे हुए हैं। वहीं, भारतीय ध्वज वाले 18 जहाजों में भी 3 एलपीजी टैंकर और 4 कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण इस संकरे समुद्री मार्ग में दुनिया भर के लगभग 500 जहाज फंसे हुए हैं। भारत के लिए राहत की बात सिर्फ इतनी है कि अब तक 8 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस ‘डेथ ज़ोन’ से बाहर निकलने में सफल रहे हैं।सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन 485 भारतीय नाविकों की जान बचाना है जो जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद 18 जहाजों पर सवार हैं। इनमें जग विक्रम, ग्रीन आशा और ग्रीन सानवी जैसे प्रमुख एलपीजी जहाज शामिल हैं। राजेश सिन्हा ने बताया कि स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि अभी नए माल के लिए खाली जहाजों को वापस फारस की खाड़ी भेजने का जोखिम नहीं लिया जा सकता। ईरान ने हालांकि ‘गैर-शत्रु’ देशों के जहाजों को रास्ता देने की बात कही है, लेकिन युद्ध की अनिश्चितता को देखते हुए बीमा प्रीमियम में भी भारी उछाल आया है। पहले जो बीमा प्रीमियम मात्र 0.04% था, वह अब बढ़कर 0.7% हो गया है, जिससे आयात की लागत कई गुना बढ़ सकती है।