खर्ग द्वीप पर हमले की सूचना से ईरान ने बनाई बचाव की रणनीति

 खर्ग द्वीप पर हमले की सूचना से ईरान ने बनाई बचाव की रणनीति
तेहरान। अमेरिका-इस्राइल के ईरान से युद्ध को करीब एक महीना हो गया है। दोनों ही पक्षों की तरफ से हमलों की जो तीव्रता शुरुआती दिनों में दिखाई थीं, अब उसकी गति धीमी पड़ी है। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं। उन्होंने सोमवार को एलान किया कि अमेरिका अगले पांच दिन ईरान से बातचीत करेगा।
इस बीच अमेरिका ने अपने 5000 मरीन सैनिकों और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों को पश्चिम एशिया की तरफ रवाना किया है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से ईरान से बातचीत का एलान सिर्फ बहाना था। बताया जा रहा है कि ट्रंप इस समय में ईरान में अमेरिका की नाकाम होती रणनीति में बदलाव करना चाहते थे, ताकि नई योजना के साथ युद्ध को नया आयाम दिया जा सके।
इनमें से एक योजना मरीन्स और एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों को ईरान के अहम कूटनीतिक केंद्रों, जैसे- खर्ग द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब ईरान के खाड़ी क्षेत्र में उतारने की हो सकती है। हालांकि, रिपोर्ट्स में अब दावा किया जा रहा है कि ईरान ने खर्ग द्वीप को सुरक्षित करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
आइये जानते हैं कि अमेरिका खर्ग पर कब्जा करने के लिए किस तरह योजनाएं तैयार कर रहा है और ईरान इसके जवाब में क्या करने की कोशिश कर रहा है?
पहले जानें- क्या है खर्ग द्वीप, ये कहां स्थित है?
खर्ग द्वीप एक छोटा प्रवाल (कोरल) द्वीप है, जो ईरान के कच्चे तेल उद्योग का सबसे बड़ा और मुख्य निर्यात टर्मिनल है। यह द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक तौर पर अहम है। देश का करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है। इसकी तेल लोडिंग क्षमता लगभग 70 लाख बैरल प्रतिदिन आंकी गई है। इसे ईरान की तेल की जीवनरेखा भी कहा जाता है। यह द्वीप समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइनों के जरिए दक्षिणी ईरान के प्रमुख तेल क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यहां बड़े स्टोरेज टैंक और सुपरटैंकरों में तेल भरने के लिए गहरे पानी तक जाने वाली लंबी जेट्टी (मार्ग) बनी हुई हैं।