• July 17, 2026

वैश्विक गैस संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा में कोयले की भूमिका मजबूत

 वैश्विक गैस संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा में कोयले की भूमिका मजबूत

नई दिल्ली- पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दिखने लगा है, जिसके बीच भारत की ऊर्जा व्यवस्था पर शुरुआती दबाव के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

हालिया घटनाक्रमों ने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जहां से भारत अपने कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। संसद में 23 मार्च को दिए गए वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ रहा है, लेकिन भारत इससे निपटने के लिए सक्रिय रणनीति अपना रहा है।
देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में CNG और LPG की आपूर्ति में बाधाएं सामने आ रही हैं, जिससे उद्योग वैकल्पिक ईंधन के रूप में कोयले की ओर रुख कर रहे हैं। भारत अपनी लगभग आधी प्राकृतिक गैस आवश्यकता LNG के रूप में आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में किसी भी व्यवधान का सीधा असर घरेलू उद्योगों पर पड़ता है।
गैस आधारित बिजली उत्पादन क्षमता का उपयोग अभी भी कम स्तर पर है, जबकि कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा देश के बिजली उत्पादन का मुख्य आधार बने हुए हैं। ऐसे में कोयला एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है, खासकर तब जब औद्योगिक क्षेत्र गैस की कमी का सामना कर रहा है।
देश में कोयले की मांग लगातार बढ़ रही है और वार्षिक खपत 1.25 अरब टन से अधिक हो चुकी है। हाल के महीनों में कोल इंडिया की ई-नीलामी में प्रीमियम बढ़कर लगभग 35 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो बाजार में मांग के बढ़ते दबाव को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार गैस की कमी, बिजली की बढ़ती मांग और आयात में कमी जैसे कारक इस रुझान को बढ़ावा दे रहे हैं।
इसके बावजूद स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है। इस वर्ष अब तक कुल नीलामी का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा ही बिक पाया है और प्रीमियम अभी भी अपने उच्चतम स्तर से नीचे हैं। वहीं बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार 18 से 20 दिनों के उपभोग के बराबर है, जिससे आपूर्ति को लेकर किसी तरह की घबराहट की स्थिति नहीं है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कोयला भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ बना हुआ है। हालांकि देश फिलहाल किसी बड़े ऊर्जा संकट का सामना नहीं कर रहा है, लेकिन बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात ऊर्जा तंत्र की मजबूती की परीक्षा जरूर ले रहे हैं।