UCC लागू करने वाला दूसरा राज्य गुजरात बना, शादी, तलाक और विरासत के लिए अब एक ही कानून

 UCC लागू करने वाला दूसरा राज्य गुजरात बना, शादी, तलाक और विरासत के लिए अब एक ही कानून
गांधीनगर। उत्तराखंड के बाद अब गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जहाँ समान नागरिक संहिता (UCC) को मंजूरी मिल गई है। गुजरात विधानसभा में ‘गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक-2026’ को बहुमत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पेश किए गए इस बिल में विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों को धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर एक समान कानूनी दायरे में लाने का प्रावधान है।
बिल की मुख्य बातें और सख्त सजा का प्रावधान है।
बहुविवाह पर रोक: राज्य में अब एक से अधिक शादी (Polygamy) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
शादी और तलाक: धोखाधड़ी या जबरन शादी करने पर 7 साल तक की जेल का प्रावधान है। हलाला जैसी प्रथाओं को खत्म करते हुए तलाक के बाद दोबारा शादी के लिए कोई शर्त नहीं होगी।
विरासत: संपत्ति के बंटवारे में बेटे और बेटियों को समान अधिकार दिए गए हैं।
अपवाद: यह कानून अनुसूचित जनजातियों (ST) पर लागू नहीं होगा।
पक्ष-विपक्ष में वार-पलटवार
पक्ष (भाजपा):
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल: “यह बिल गुजरात की बहनों और बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए है। यह विकसित भारत 2047 की दिशा में एक बड़ा कदम है।”
गृह मंत्री अमित शाह: “यह समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। भाजपा अपनी स्थापना के समय से ही ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ के लिए प्रतिबद्ध रही है।”
हर्ष संघवी (डिप्टी सीएम): “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। यह सशक्त और समान गुजरात की नींव है।”
विपक्ष (कांग्रेस व AAP):
अमित चावड़ा (कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष): “यह बिल पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। सरकार ने रंजना देसाई कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना इसे जल्दबाजी में पेश किया है।”
इमरान खेड़ावाला (कांग्रेस विधायक): “मैं पूरे मुस्लिम समुदाय की ओर से इस बिल का विरोध करता हूँ। यह हमें शरीयत कानून से दूर करने की कोशिश है और पूरी तरह ‘मुस्लिम विरोधी’ है।”
चैतर वसावा (AAP विधायक): “सरकार केवल चुनाव जीतने के लिए यह बिल लाई है। आदिवासी समुदायों और अन्य समुदायों की स्थिति को लेकर इसमें कोई स्पष्टता नहीं है।”