पीएनजी की पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाने के निर्देश, कनेक्शन लेना अनिवार्य
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- March 25, 2026
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी जंग से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यावधान आया है। होर्मुज के प्रभावित होने से पेट्रोलियम पदार्थों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इस बीच, सरकार ने देश में रसोई गैस की आपूर्ति को आसान बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मंगलवार को एक प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026 जारी किया है। इसके तहत जिन इलाकों में पीएनजी की आपूर्ति उपलब्ध है वहां के लोगों के लिए इसका कनेक्शन लेना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, ऐसा नहीं करने पर तीन महीने में उनकी एलपीजी की आपूर्ति रोकने की बात कही गई है। सरकार की ओर से जारी आदेश में क्या कहा गया है। आइए आसान सवाल-जवाब में समझें।
पश्चिम एशिया में जारी लड़ाई के बीच देश में एलपीजी संकट जारी है। इस बीच सरकार ने एक आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, अगर किसी इलाके में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है और वहां का उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन नहीं लेता है, तो अधिकृत एजेंसी की ओर से सूचना दिए जाने के तीन महीने बाद संबंधित उपभोक्ता के घर की एलपीजी आपूर्ति पूरी तरह से रोक दी जाएगी।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण भारत को एलपीजी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। खाड़ी देशों में गैस तरलीकरण सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है और होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार रुकावटें आ रही हैं। ऐसे में, सरकार किसी एक ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए ‘ईंधन विविधीकरण’ को बढ़ावा दे रही है। इसका मुख्य मकसद उन शहरी इलाकों से एलपीजी की आपूर्ति मुक्त करना है जहां पाइपलाइन मौजूद है, ताकि इन सिलेंडरों को उन दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जा सके जहां पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा नहीं है।
नए नियमों के तहत हाउसिंग सोसायटियों की मनमानी पर रोक लगा दी गई है। पहुंच को नियंत्रित करने वाली संस्थाओं को तीन कार्य दिवसों के भीतर अनुमति देनी होगी, और 48 घंटे के भीतर अंतिम-छोर कनेक्टिविटी प्रदान करनी होगी। ऐसे क्षेत्रों में पाइपलाइन के आवेदनों को खारिज नहीं किया जा सकता। अगर कोई हाउसिंग कॉम्प्लेक्स अनुमति नहीं देता है, तो उसे एक नोटिस जारी किया जाएगा और उसके तीन महीने बाद तेल विपणन कंपनियां उस पूरे कॉम्प्लेक्स की एलपीजी आपूर्ति रोक देंगी। विवादों को सुलझाने के लिए नामित अधिकारियों को सिविल कोर्ट के समान शक्तियां दी गई हैं।
पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरणों को तय समय के भीतर अनुमतियां देनी होंगी। ऐसा न करने पर मंजूरी स्वतः प्राप्त मान ली जाएगी। इसके अलावा, गैस वितरण कंपनियों को मंजूरी मिलने के चार महीने के भीतर काम शुरू करना होगा, वरना उन पर जुर्माना लग सकता है या उनकी क्षेत्रीय विशिष्टता खत्म हो सकती है। इन सभी नियमों के पालन और निगरानी का जिम्मा ‘पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड’ को सौंपा गया है।
ऐसे मामलों में उपभोक्ता को छूट का प्रावधान है। यदि अधिकृत गैस कंपनी यह प्रमाणित करती है कि पाइपलाइन कनेक्शन देना ‘तकनीकी रूप से अव्यवहार्य’ है, तो वह एक अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करेगी और उस घर की एलपीजी आपूर्ति बंद नहीं होगी। हालांकि, कंपनी को इस तकनीकी कारण का रिकॉर्ड रखना होगा और भविष्य में जब भी कनेक्टिविटी देना संभव होगा, वह एनओसी वापस ले लेगी।
देश में पीएनजी गैस को एलपीजी की तुलना में लोगों के घरों तक पहुंचाना आसान है। प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी सीधे पाइपलाइन के जरिए रसोई के बर्नर तक निरंतर पहुंचाई जाती है, इससे उपभोक्ताओं को बार-बार सिलिंडर बुक जैसी परेशानी से मुक्ति मिल जाती है। यह एलपीजी सिलिंडर की तुलना में एक अधिक सुविधाजनक विकल्प है जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाना एलपीजी की तुलना में आसान है।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण भारत को एलपीजी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। खाड़ी देशों में गैस तरलीकरण सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है और होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार रुकावटें आ रही हैं। ऐसे में, सरकार किसी एक ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए ‘ईंधन विविधीकरण’ को बढ़ावा दे रही है। इसका मुख्य मकसद उन शहरी इलाकों से एलपीजी की आपूर्ति मुक्त करना है जहां पाइपलाइन मौजूद है, ताकि इन सिलेंडरों को उन दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जा सके जहां पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा नहीं है।
नए नियमों के तहत हाउसिंग सोसायटियों की मनमानी पर रोक लगा दी गई है। पहुंच को नियंत्रित करने वाली संस्थाओं को तीन कार्य दिवसों के भीतर अनुमति देनी होगी, और 48 घंटे के भीतर अंतिम-छोर कनेक्टिविटी प्रदान करनी होगी। ऐसे क्षेत्रों में पाइपलाइन के आवेदनों को खारिज नहीं किया जा सकता। अगर कोई हाउसिंग कॉम्प्लेक्स अनुमति नहीं देता है, तो उसे एक नोटिस जारी किया जाएगा और उसके तीन महीने बाद तेल विपणन कंपनियां उस पूरे कॉम्प्लेक्स की एलपीजी आपूर्ति रोक देंगी। विवादों को सुलझाने के लिए नामित अधिकारियों को सिविल कोर्ट के समान शक्तियां दी गई हैं।
पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरणों को तय समय के भीतर अनुमतियां देनी होंगी। ऐसा न करने पर मंजूरी स्वतः प्राप्त मान ली जाएगी। इसके अलावा, गैस वितरण कंपनियों को मंजूरी मिलने के चार महीने के भीतर काम शुरू करना होगा, वरना उन पर जुर्माना लग सकता है या उनकी क्षेत्रीय विशिष्टता खत्म हो सकती है। इन सभी नियमों के पालन और निगरानी का जिम्मा ‘पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड’ को सौंपा गया है।
ऐसे मामलों में उपभोक्ता को छूट का प्रावधान है। यदि अधिकृत गैस कंपनी यह प्रमाणित करती है कि पाइपलाइन कनेक्शन देना ‘तकनीकी रूप से अव्यवहार्य’ है, तो वह एक अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करेगी और उस घर की एलपीजी आपूर्ति बंद नहीं होगी। हालांकि, कंपनी को इस तकनीकी कारण का रिकॉर्ड रखना होगा और भविष्य में जब भी कनेक्टिविटी देना संभव होगा, वह एनओसी वापस ले लेगी।
देश में पीएनजी गैस को एलपीजी की तुलना में लोगों के घरों तक पहुंचाना आसान है। प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी सीधे पाइपलाइन के जरिए रसोई के बर्नर तक निरंतर पहुंचाई जाती है, इससे उपभोक्ताओं को बार-बार सिलिंडर बुक जैसी परेशानी से मुक्ति मिल जाती है। यह एलपीजी सिलिंडर की तुलना में एक अधिक सुविधाजनक विकल्प है जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाना एलपीजी की तुलना में आसान है।
