संघर्ष के बीच भारतीय टैकरों को होर्मुज से सुरक्षित निकाला,सक्रिय कूटनीति का दिखा असर

 संघर्ष के बीच भारतीय टैकरों को होर्मुज से सुरक्षित निकाला,सक्रिय कूटनीति का दिखा असर
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय की सक्रिय कूटनीति का बड़ा असर देखने को मिला है। सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में पिछले 10 दिनों से फंसे एक भारतीय एलपीजी (LPG) टैंकर को ईरानी नौसेना ने सुरक्षित रास्ता देकर बाहर निकाला है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना ने न केवल भारतीय जहाज से रेडियो संपर्क बनाए रखा, बल्कि उसे एक निर्धारित सुरक्षित मार्ग (कंट्रोल पासेज सिस्टम) के जरिए हमलों से बचाते हुए पार कराया।
13 मार्च की रात चला ‘सीक्रेट’ रेस्क्यू ऑपरेशन सूत्रों के अनुसार, ईरानी नेवी ने 13 मार्च की रात को इस भारतीय जहाज को एस्कॉर्ट किया। सुरक्षा कारणों से जहाज का ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया गया था। भारत और ईरान के बीच उच्च स्तरीय बातचीत के बाद यह संभव हो सका है। वर्तमान में ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’  नामक दो भारतीय जहाज एलपीजी लेकर भारत पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 22 अन्य भारतीय जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार ईरानी समकक्ष के संपर्क में हैं।
ईरान का इजराइली ठिकानों पर हमले का दावा, 200 की मौत?
दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसके मिसाइल हमलों में इजराइल के डिमोना और इलात सहित कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है और 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। हालांकि, इजराइल ने मौतों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर है। ईरान ने कुवैत और यूएई स्थित अमेरिकी एयरबेस को भी निशाना बनाने का दावा किया है।