भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026: ऊर्जा परिवर्तन में वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत का मजबूत कदम
नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के पहले दिन भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे व्यापक बदलाव और भविष्य की दिशा को लेकर गहन मंथन देखने को मिला। चार दिवसीय इस वैश्विक सम्मेलन एवं प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, राज्य मंत्री श्रिपद नाइक, ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद सहित देश-विदेश के नीति निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और निवेशक उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मनोहर लाल ने भारत की ऊर्जा यात्रा को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि देश ने निर्धारित समय से पहले 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब ऊर्जा क्षेत्र में आने वाले दो दशकों में लगभग 200 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपनी बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में सक्षम हो रहा है, बल्कि भविष्य में सस्ती ऊर्जा के वैश्विक निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है। उन्होंने ट्रांसमिशन नेटवर्क में 72 प्रतिशत वृद्धि, 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक नेटवर्क विस्तार और 250 गीगावाट की अधिकतम मांग को सफलतापूर्वक पूरा करने का उल्लेख करते हुए भविष्य की बढ़ती जरूरतों के लिए देश की तैयारियों पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने क्रॉस-बॉर्डर ऊर्जा कनेक्टिविटी और समुद्री ट्रांसमिशन नेटवर्क जैसी पहलों को ऊर्जा सुरक्षा के नए आयाम बताया।
ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि बिजली अब केवल एक बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, डिजिटल परिवर्तन और सामाजिक समावेशन की आधारशिला बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत बिजली की कमी से निकलकर लगभग अधिशेष की स्थिति में पहुंच चुका है और देश की कुल स्थापित क्षमता 520 गीगावाट से अधिक हो गई है, जिसमें आधे से ज्यादा योगदान गैर-जीवाश्म स्रोतों का है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सिंक्रोनाइज्ड ग्रिड में से एक का संचालन कर रहा है और स्मार्ट मीटरिंग तथा डिजिटल तकनीकों के माध्यम से बिजली क्षेत्र को अधिक पारदर्शी और सक्षम बनाया जा रहा है।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्रिपद नाइक ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से भारत के ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं और स्थापित क्षमता दोगुनी से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा 2.8 गीगावाट से बढ़कर 143 गीगावाट से अधिक हो गई है और लाखों घरों तथा किसानों की भागीदारी से ऊर्जा क्षेत्र में एक सहभागी मॉडल विकसित हो रहा है। उन्होंने ट्रांसमिशन नेटवर्क, ऊर्जा भंडारण और नए बाजार तंत्रों को भविष्य की जरूरत बताते हुए सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि दीर्घकालिक दृष्टि से नवीकरणीय ऊर्जा ही स्थायी समाधान है, हालांकि बेसलोड आवश्यकताओं के लिए तापीय ऊर्जा की भूमिका बनी रहेगी। उन्होंने सौर और पवन ऊर्जा की लागत में आई कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण योजनाएं भी जारी कीं, जिनमें नेशनल रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान और वर्ष 2035-36 तक 900 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म क्षमता के एकीकरण के लिए ट्रांसमिशन योजना शामिल है। इस व्यापक योजना के तहत बड़े पैमाने पर ट्रांसमिशन अवसंरचना के विकास और ग्रिड को अधिक मजबूत एवं लचीला बनाने पर जोर दिया गया है।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि ऊर्जा संक्रमण अब केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ऊर्जा तंत्र को अधिक लचीला, विश्वसनीय और कुशल बनाने की दिशा में काम हो रहा है। विशेषज्ञों ने ऊर्जा भंडारण, डिमांड मैनेजमेंट, मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और परमाणु ऊर्जा को इस परिवर्तन के प्रमुख स्तंभ बताया। साथ ही वितरण क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को भी महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया।

डिजिटल एनर्जी स्टैक पर चर्चा में यह सामने आया कि बिजली क्षेत्र तेजी से डेटा आधारित और उपभोक्ता-केंद्रित होता जा रहा है, जहां उपभोक्ता अब उत्पादक की भूमिका भी निभा रहे हैं। ओपन डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई तकनीकों के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सत्रों में विभिन्न देशों ने ऊर्जा संक्रमण के अपने अनुभव साझा करते हुए भारत को एक विश्वसनीय ऊर्जा भागीदार के रूप में देखा और क्षेत्रीय सहयोग, निवेश तथा तकनीकी साझेदारी को भविष्य की कुंजी बताया। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी माना कि भारत का ऊर्जा क्षेत्र अब बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के चरण में पहुंच चुका है, जहां नीति स्थिरता, नवाचार और संतुलित ऊर्जा मिश्रण सफलता के प्रमुख आधार होंगे।
पहले दिन की चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और भारत इस परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभाते हुए एक स्वच्छ, सशक्त और समावेशी ऊर्जा भविष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
