युद्ध की आग रसोई तक, होटलों और रेस्टोरेंट का बदला मेनू

 युद्ध की आग रसोई तक, होटलों और रेस्टोरेंट का बदला मेनू

नई दिल्ली। आज अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट में गर्मागर्म डोसा, पूरी या अपनी पसंद की चाय पीने जा रहे हैं, तो शायद ऐसा करने में देश के कुछ हिस्सों में आपको निराशा हाथ लग सकती है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने भारत में वाणिज्यिक रसोई गैस का भारी संकट पैदा कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि मुंबई्, बंगलूरू, चेन्नई और दिल्ली-एनसीआर में बड़े पैमाने पर होटल और रेस्तरा कमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति प्रभावित होने से संकट में हैं। कई जगहों पर मेनू छोटे किए जा रहे हैं। खाना पकाने वाली गैस की सप्लाई घटने से राशनिंग की नौबत आ गई है। आइए एक आम उपभोक्ता के नजरिए से समझते हैं खाड़ी में चल रहा यह युद्ध हमारी थाली अब कैसे प्रभावित करने लगा है?

मेनू में बदलाव

चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में रेस्टोरेंट ने डोसा और पूरी जैसे ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजन बनाना बंद कर दिया है। नई दिल्ली के एक ढाबे के बाहर तो बकायदा बोर्ड लगा दिया गया कि ‘आज सिर्फ दाल-चावल मिलेंगे’।

चाय-कॉफी पर संकट: गुजरात की एक ऑटोमोबाइल फैक्ट्री की कैंटीन ने तली हुई चीज बंद कर दी हैं और चाय की जगह नींबू पानी और गर्म सूप की जगह छाछ देना शुरू कर दिया है।

हॉस्टल और पीजी

हैदराबाद के आईटी कॉरिडोर में हॉस्टल वालों ने राजमा और छोले जैसी चीजें बनानी बंद कर दी हैं, जिससे उत्तर भारतीयों को खासी परेशानी हो रही है। दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में भी मुख्य भोजन हटाकर केवल सैंडविच, सलाद और फ्रूट चाट दिए गए।

रसोई गैस संकट की असली वजह?

इस संकट की जड़ें पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से जुड़ी हैं।

युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र से होने वाले व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही पर रोक लग गई है। इससे ऊर्जा और परिवहन लागत बढ़ गई है और मध्य पूर्व से तेल व गैस का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक होने के नाते भारत पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ा है। इस संकट से छोटे कारोबारियों और टूरिज्म पर क्या असर पड़ रहा है?

इस गैस किल्लत से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और छोटे व्यवसायों पर दोहरी मार पड़ी है।

रेस्टोरेंट बंदी

पुणे का मशहूर ‘मॉडर्न कैफे’ गैस खत्म होने के कारण लगातार दो दिन बंद रहा। पर्यटन पर खतरा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और गोवा जैसे पर्यटन राज्यों में होटल मालिक डरे हुए हैं। धर्मशाला होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी बाम्बा के मुताबिक, गैस की अनिश्चितता के कारण होटल वाले एडवांस बुकिंग लेने से कतरा रहे हैं।

फूड डिलीवरी

एलारा सिक्योरिटीज के विश्लेषक करण तौरानी का मानना है कि इस ईंधन संकट से रेस्टोरेंट की क्षमता घटेगी और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी असर पड़ेगा। लोग अब इलेक्ट्रिक ओवन और फ्रायर का इस्तेमाल करने वाले ‘क्विक सर्विस चेन’ की तरफ रुख कर सकते हैं।