आबकारी केस में आरोप मुक्त के बाद केजरीवाल-सिसोदिया ने हनुमान मंदिर में की पूजा
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- February 28, 2026
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नई दिल्ली। विशेष अदालत ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील आबकारी घोटाले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एवं तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के कविता और 20 अन्य लोगों को आरोप मुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि गंभीर संदेह तो दूर की बात है, इसमें तो प्रथमदृष्टया मामला भी नहीं बनता। वहीं, आज केजरीवाल, पार्टी नेताओं के साथ हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले में सीबीआई की चार्जशीट को खारिज कर दिया है। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को आरोप तय करने से इनकार करते हुए बरी कर दिया। अदालत ने सीबीआई के आरोपों को अपर्याप्त, विरोधाभासी और बिना ठोस सबूतों के बताते हुए जांच एजेंसी की साजिश थ्योरी को कमजोर करार दिया। इस फैसले के बाद आज केजरीवाल और सिसोदिया ने पार्टी नेताओं के साथ दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
मामले की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब सीबीआई ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी 2021-22 में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (आरोपी-8) और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (आरोपी-18) समेत अन्य ने निजी शराब कारोबारियों के साथ मिलीभगत कर नीति को प्रभावित किया, जिससे करोड़ों रुपये का अवैध लाभ हुआ। सीबीआई की मुख्य चार्जशीट और चार पूरक चार्जशीट्स में कुल 23 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, समीर महेंद्रू, के. कविता और अन्य शामिल थे। आरोप थे कि नीति में बदलाव से थोक विक्रेताओं को 12% मार्जिन दिया गया, जो कथित तौर पर रिश्वत के रूप में साझा किया गया।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने कहा, ऐसा लगता है कि जांच पूर्वनिर्धारित दिशा में आगे बढ़ी, जिसमें नीति बनाने या कार्यान्वयन से जुड़े लगभग हर व्यक्ति को फंसाया गया, ताकि अन्यथा कमजोर कहानी को गहराई और विश्वसनीयता का भ्रम दिया जा सके। कोर्ट ने कहा, रिकॉर्ड पर रखी सामग्री का मूल्यांकन ऐसी जांच पद्धति को उजागर करता है, जिसके जरिये कानूनी रूप से स्वीकार्य सामग्री के अभाव में बड़ी व जटिल साजिश का आभास पैदा करने की कोशिश की जाती है। कोर्ट ने हिदायत दी, अनुमान एवं धारणा की जगह जांच एजेंसियों को निष्पक्षता के साथ सिर्फ प्रामाणिक एवं ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही मुकदमे दायर करने चाहिए।
मामले की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब सीबीआई ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी 2021-22 में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (आरोपी-8) और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (आरोपी-18) समेत अन्य ने निजी शराब कारोबारियों के साथ मिलीभगत कर नीति को प्रभावित किया, जिससे करोड़ों रुपये का अवैध लाभ हुआ। सीबीआई की मुख्य चार्जशीट और चार पूरक चार्जशीट्स में कुल 23 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, समीर महेंद्रू, के. कविता और अन्य शामिल थे। आरोप थे कि नीति में बदलाव से थोक विक्रेताओं को 12% मार्जिन दिया गया, जो कथित तौर पर रिश्वत के रूप में साझा किया गया।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने कहा, ऐसा लगता है कि जांच पूर्वनिर्धारित दिशा में आगे बढ़ी, जिसमें नीति बनाने या कार्यान्वयन से जुड़े लगभग हर व्यक्ति को फंसाया गया, ताकि अन्यथा कमजोर कहानी को गहराई और विश्वसनीयता का भ्रम दिया जा सके। कोर्ट ने कहा, रिकॉर्ड पर रखी सामग्री का मूल्यांकन ऐसी जांच पद्धति को उजागर करता है, जिसके जरिये कानूनी रूप से स्वीकार्य सामग्री के अभाव में बड़ी व जटिल साजिश का आभास पैदा करने की कोशिश की जाती है। कोर्ट ने हिदायत दी, अनुमान एवं धारणा की जगह जांच एजेंसियों को निष्पक्षता के साथ सिर्फ प्रामाणिक एवं ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही मुकदमे दायर करने चाहिए।
