एनबीसीसी और डीडीए के बीच ओल्ड राजिंदर नगर एवं एसडीए में स्टाफ क्वार्टरों के पुनर्विकास हेतु समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित
नई दिल्ली: आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक नवरत्न सीपीएसई, एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के साथ ओल्ड राजिंदर नगर (ORN) और सफदरजंग डेवलपमेंट एरिया (SDA), नई दिल्ली स्थित डीडीए स्टाफ क्वार्टरों के व्यापक पुनर्विकास के लिए दो पृथक समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इन परियोजनाओं को डीडीए द्वारा एमपीडी-2021 तथा पुनर्विकास योजनाओं की नीति के प्रावधानों के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान की गई है और इन्हें स्व-टिकाऊ मॉडल पर क्रियान्वित किया जाएगा। समझौता ज्ञापनों पर डीडीए की ओर से आयुक्त (आवास) कुनाल कश्यप तथा एनबीसीसी की ओर से सीजीएम (इंजीनियरिंग) अनिल कुमार ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डीडीए के उपाध्यक्ष एन. सरवणा कुमार और एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के. पी. महादेवस्वामी सहित दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
दोनों परियोजनाओं के अंतर्गत कुल लगभग 1.66 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र का विकास किया जाएगा, जिसकी अनुमानित कुल परियोजना लागत लगभग 775 करोड़ रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) है। इसमें ओल्ड राजिंदर नगर में लगभग 1 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र का विकास 438 करोड़ रुपये की लागत से तथा एसडीए में लगभग 66 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र का विकास 337 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है। प्रस्तावित निर्मित क्षेत्र प्रारंभिक है और विस्तृत सर्वेक्षण एवं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की स्वीकृति के पश्चात अंतिम रूप दिया जाएगा। वर्तमान में ओल्ड राजिंदर नगर में 117 तथा एसडीए में 152 आवासीय इकाइयों का उपयोग डीडीए स्टाफ क्वार्टर के रूप में किया जा रहा है। इन भवनों की आयु और वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एवं सुव्यवस्थित अवसंरचना के साथ पुनर्विकास की योजना बनाई गई है।
एनबीसीसी इन परियोजनाओं में परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता एवं कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में अवधारणा से लेकर पूर्णता तक कार्य करेगी। पुनर्विकास स्व-टिकाऊ मॉडल पर आधारित होगा, जिसके तहत विकसित निर्मित क्षेत्र के एक हिस्से को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से विक्रय किया जाएगा और उससे प्राप्त आय से परियोजना का वित्तपोषण किया जाएगा, जबकि शेष क्षेत्र डीडीए के निर्णयानुसार स्टाफ उपयोग हेतु उपलब्ध कराया जाएगा।
एनबीसीसी के कार्यक्षेत्र में प्रत्येक स्थल पर लगभग चार हेक्टेयर क्षेत्र का समग्र मास्टर प्लान तैयार करना, विस्तृत लागत एवं राजस्व मॉडल सहित डीपीआर तैयार करना, एमपीडी-2021 और सीपीडब्ल्यूडी मानकों के अनुरूप वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करना, वास्तु एवं इंजीनियरिंग डिजाइन, निविदा प्रक्रिया, ईपीसी आधारित निर्माण, तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण तथा परियोजना की पूर्णता एवं कमीशनिंग शामिल है। वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त होने और अवरोध-मुक्त भूमि हस्तांतरण के बाद परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से तीन वर्षों की अवधि में पूर्ण करने का प्रस्ताव है।
डीडीए के उपाध्यक्ष एन. सरवणा कुमार ने इस समझौते को एक अनूठी पहल बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि एनबीसीसी विश्वस्तरीय वास्तुकला और अत्याधुनिक सुविधाओं के माध्यम से नए मानक स्थापित करेगी। एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के. पी. महादेवस्वामी ने कहा कि यह समझौता राष्ट्रीय राजधानी में सतत शहरी पुनर्विकास और मूल्यवान भूमि संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये परियोजनाएं आधुनिक आवासीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेंगी और एक सुव्यवस्थित स्व-टिकाऊ मॉडल के माध्यम से वित्तीय संतुलन भी सुनिश्चित करेंगी।
ये समझौता ज्ञापन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बीच निरंतर सहयोग को दर्शाते हैं और नई दिल्ली में संरचित शहरी पुनर्जनन एवं आवासीय अवसंरचना के आधुनिकीकरण के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।
