• July 17, 2026

एम-4 राइफल और  स्टील की गोलियों से लैस लगभग ‘85’ पाकिस्तानी दहशतगर्द घाटी में छिपे 

 एम-4 राइफल और  स्टील की गोलियों से लैस लगभग ‘85’ पाकिस्तानी दहशतगर्द घाटी में छिपे 
नई दिल्ली। कश्मीर में छिपे पाकिस्तानी आतंकियों को अब उनके ठिकानों पर ही खत्म किया जाएगा। सुरक्षाबल आतंकियों के बाहर निकलने का इंतजार नहीं करेंगे। जम्मू-कश्मीर में फिलहाल, यूएस एम-4 राइफल और  स्टील की गोलियों से लैस लगभग ‘85’ पाकिस्तानी दहशतगर्द छिपे हैं। ये गोलियां, ‘लेवल 3’ श्रेणी के बुलेटप्रूफ वाहन, मोर्चा, जैकेट और पटके को भेद देते हैं। सुरक्षाबलों ने अब इसका तोड़ निकाल लिया है।
नई रणनीति के तहत ज्यादा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में छिपे दहशतगर्दों के ठिकानों पर अब मोर्टार से गोले बरसाए जाएंगे। किश्तवाड़ में तीन दिन पहले एक भीष्ण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों का खात्मा कर दिया था। मुठभेड़ स्थल से जो हथियार बरामद हुए, उनमें दो एके-47 राइफल, एक एम-4 राइफल और स्टील की बुलेट बरामद की गई हैं। पांच-छह वर्ष के दौरान यहां कई जगहों पर आतंकियों के पास एम-4 राइफल मिली हैं। स्टील की गोलियां भी बरामद हुई हैं।
जम्मू में पाकिस्तानी आतंकियों की संख्या 30-40 बताई जा रही है, जबकि कश्मीर में 40-57 के आसपास है। लोकल आतंकियों की संख्या छह है। इनमें से दो आतंकी लतीफ और जाकिर, जेएंडके में छिपे हैं, बाकी चार की लोकेशन सीमा पार बताई गई है। इनमें से ज्यादातर आतंकी ऊंचाई वाले पहाड़ों पर बनी प्राकृतिक गुफाओं में छिपे हैं। ये आतंकी एम-4 राइफल और स्टील की गोलियों से लैस हैं।

घातक मारक क्षमता
7.62 एमएम स्टील कोर की गोलियों की मारक क्षमता तीन सौ मीटर तक बताई गई है। आतंकी, इनका इस्तेमाल ज्यादातर एंबुश में करते हैं। महज कुछ मीटर की दूरी से एम-4, एके-47 या इसी सीरिज की किसी दूसरी राइफल से इसका फायर किया जाता है। ज्यादातर बुलेटप्रूफ वाहन, मोर्चा, जैकेट और पटका ‘लेवल 3’ श्रेणी वाले होते हैं। अगर इन पर स्टील की गोलियां दागी जाती हैं तो वे आर-पार हो जाती हैं।