भाजपा का राहुल गांधी को जवाब, पीएम मोदी भविष्य के एआई आर्किटेक्ट’

 भाजपा का राहुल गांधी को जवाब, पीएम मोदी भविष्य के एआई आर्किटेक्ट’
चेन्नई। एआई समिट में कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी टिप्पणी करते हुए तमिलनाडु भाजपा ने राहुल गांधी की तीखी आलोचना की है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस अभी भी पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम से चिपकी हुई है। पीएम मोदी भारत के एआई भविष्य के आर्किटेक्ट हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को घेरते हुए भाजपा प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने कहा कि उनके पास रचनात्मक टेक्नोलॉजी विजन का अभाव है। इसलिए वे विघटनकारी राजनीति में लगे हुए हैं। भाजपा प्रवक्ता ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के भविष्य का ‘एआई आर्किटेक्ट’ बताया, जबकि राहुल और कांग्रेस को शर्मनाक अप्रचलित वायरस बताया।
‘कांग्रेस अभी भी पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम से चिपकी’
उन्होंने लिखा, ‘भारत के पुनरुत्थान के डिजिटल युग में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी ‘वेव्स समिट’ और ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ दो प्रकाश स्तंभों की तरह चमक रहे हैं, जो अभूतपूर्व शक्ति से ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को प्रज्वलित कर रहे हैं। ये शक्ति-संचार एआई की असीम संभावनाओं को खोलते हुए युवाओं और क्रिएटिव कोडर्स को सशक्त बना रहे हैं, ताकि वे ऐसा भविष्य तैयार कर सकें जहां नवाचार देश की ग्रोथ को आगे बढ़ाए।’
एएनएस प्रसाद ने कहा, ‘भारतीय छात्रों और युवाओं ने ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के नजरिए से लीडरशिप को समझा है कि पीएम मोदी दूरदर्शिता और प्रगतिशील सोच के साथ भारत को वैश्विक एआई प्रभुत्व की ओर अग्रसर कर रहे हैं। साथ ही, वे समावेशी नवाचार, नैतिक ढांचे और युवा सशक्तिकरण के माध्यम से वे रचनात्मक प्रतिभाओं को आर्थिक शक्ति में बदल रहे हैं।’
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह समिट पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व कौशल का उदाहरण है, जो यह वैश्विक सहयोग, युवा मंच और पॉलिसी एक्सेलरेटर क्रिएटिविटी को नई गति देता है। एनीमेशन, गेमिंग और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में रोजगार सृजन के माध्यम से भारत वैश्विक नवाचार केंद्रों को चुनौती दे रहा है।
कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष को निशाने पर लेते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘राहुल गांधी ऐसे उदाहरण के रूप में सामने आते हैं कि नेतृत्व कैसा नहीं होना चाहिए। वे विघटनकारी और पुरानी सोच से ग्रस्त हैं और भारत की तकनीकी आकांक्षाओं को कमजोर करते हैं। वे पुराने सिस्टम की गलतियों, रुके हुए अपडेट और लगातार क्रैश जैसे हालात के जरिए डिजिटलीकरण की बजाय विभाजन को बढ़ावा देते हुए दिखाई देते हैं।’