मेड इन इंडिया पड़ेगा चीन पर भारी, टैरिफ से वैश्विक बाजार में बढ़त

 मेड इन इंडिया पड़ेगा चीन पर भारी, टैरिफ से वैश्विक बाजार में बढ़त
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से मेड इन इंडिया पड़ेगा चीन पर भारी, टैरिफ से वैश्विक बाजार में बढ़त बढेगी। चीन पर ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के बीच मेड इन इंडिया उत्पादों को वैश्विक बाजार में बढ़त मिल सकती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन से हटकर भारत में निवेश बढ़ा सकती हैं।
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते का असर केवल इन्हीं दो देशों तक सीमित नहीं रहने वाला है। आने वाले वक्त में इसके जरिए भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में चीनी कंपनियों के मुकाबले बढ़त हासिल हो सकती है, क्योंकि चीन पर अमेरिका ने 37 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग वस्तुओं, रत्न, आभूषण व चर्म उत्पाद क्षेत्र में निर्माण बढ़ने से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। चीन के मुकाबले अब मेड इन इंडिया को बढ़त हासिल होगी।
भारत विनिर्माण क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसमें उसकी प्रतिस्पर्धा चीन से है। पहले ब्रिटेन, फिर यूरोपीय संघ व अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से वैश्विक कारोबारी नक्शे में देश की स्थिति बेहतर हुई है। भारत निर्यातकों को इन देशों के विशाल बाजार में अपना माल उपलब्ध कराने का रास्ता खुल रहा है।
इससे सप्लाई चेन के मामले में उसे मजबूती मिलेगी और वह दुनिया भर के लिए बेहतर निवेश गंतव्य के रूप में उभरने लगा है। निकट भविष्य में भारत एआई एवं क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अमेरिका के साथ सहयोग और बढ़ाएगा। इसमें उसे तकनीकी मदद भी मिलेगी। रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ के फिलहाल हटने से भी भारत को बड़ी राहत मिली है।