नई दिल्ली में “पे.फी” के 8वें राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ!
दिनेश कुमार गौड़
नई दिल्ली, 6 फरवरी 2026 :
फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PEFI) द्वारा आयोजित “8वां राष्ट्रीय सम्मेलन ऑन फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज़–2026” का भव्य उद्घाटन आज नई दिल्ली स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में किया गया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से 700 से अधिक शारीरिक शिक्षा शिक्षक, कोच, प्रशासक, शोध विद्वान और शारीरिक एजेंट–स्कूल शिक्षा व खेल से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय “Global Spotlight: India’s Transformative Vision for the 2036 Olympics” रखा गया है। इस विषय के माध्यम से भारत की ओलंपिक 2036 की महत्वाकांक्षा को साकार करने में शारीरिक शिक्षा, खेल विज्ञान और जमीनी स्तर पर खेल विकास की भूमिका पर व्यापक मंथन किया जा रहा है। यह सम्मेलन केवल खेल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में खेल संस्कृति, शारीरिक शिक्षा और खेल विज्ञान को भविष्य की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ने का एक ठोस प्रयास है।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री शोभित जैन, पे फ़ी के अध्यक्ष डॉ ए. के. बंसल जी, डॉ उप्पल जी पे फ़ी के राष्ट्रीय सचिव डॉ पीयूष जैन आदि ने किया।
कार्यक्रम में विजुअल संदेश में खेल एवं युवा केंद्रीय मंत्री श्री मनसुख मांडवीया जी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की 2036 ओलंपिक दृष्टि का आधार स्कूल स्तर से मजबूत शारीरिक शिक्षा प्रणाली के निर्माण में निहित है। उन्होंने पे फ़ी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि खेल और शारीरिक शिक्षा के माध्यम से युवा सशक्तिकरण, सामाजिक समावेशन और राष्ट्र निर्माण को नई दिशा मिलेगी। खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री शोभित जैन ने अपने संबोधन में कहा कि कि हमें 2036 के ओलंपिक को विजन को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारी करनी चाहिए़ हम खेलों में केवल सहभागिता के अवसर को पदकों में परिवर्तित करें हमें दूसरे देशों की तरह दस वर्ष पहले तैयारी करनी होगी तभी हम पदक तालिका में टॉप टेन में आ पाएंगे विधायक सतीश उपाध्याय ने खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते कहा कि खेलों से समाज में संगठन की भावना और सामाजिक समरसता के भाव को बढ़ावा मिलता है
खेल को जीवन का महत्व पूर्ण हिस्सा होना चाहिए़ न कि विकल्प
पे फ़ी के नेशनल सेक्रेटरी डॉ. पियूष जैन ने देशभर से आए प्रतिभागियों, विशिष्ट अतिथियों और गणमान्य प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षा, खेल विज्ञान और उच्च प्रदर्शन खेल के क्षेत्र में यह सम्मेलन एक ऐतिहासिक पहल है।
उद्घाटन सत्र में विशेष अतिथि के रूप में डॉ. ए. के. बंसल (अध्यक्ष, PEFI) ने कहा कि यह सम्मेलन केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं है, बल्कि भारत के खेल भविष्य की एक सामूहिक कार्ययोजना तैयार करने का प्रयास है। उन्होंने मंत्रालय के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
डॉ. श्याम सुंदर दुबे, पूर्व डायरेक्टर, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, ने उच्च प्रदर्शन खेल, ओलंपिक मॉडल और विश्वविद्यालयों की भूमिका पर अपने अनुभव साझा किए। वहीं डॉ. किशोर कुलपति, कुलपति, यंग इंडिया स्किल यूनिवर्सिटी, तेलंगाना ने कौशल आधारित खेल शिक्षा और नवाचार पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन के दौरान एक आधारभूत अध्ययन एवं सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें देशभर के राज्यों और शिक्षा बोर्डों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर स्कूल स्तर पर खेल अवसंरचना, शारीरिक शिक्षा पीरियड्स, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता और खेल सहभागिता की वास्तविक स्थिति प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि 2036 ओलंपिक दृष्टि को साकार करने के लिए स्कूल स्तर से ही वैज्ञानिक और संरचित खेल विकास कार्यक्रम अनिवार्य हैं।

उद्घाटन के बाद आयोजित पहली पैनल चर्चा “Sports as a Tool for Social Change” विषय पर केंद्रित रही। इस चर्चा में खेल को सामाजिक समावेशन, युवा सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के प्रभावी माध्यम के रूप में रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि खेल कैसे लैंगिक समानता, सामुदायिक सौहार्द और स्कूल ड्रॉपआउट में कमी लाने में सहायक हो सकता है।
दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान 2036 ओलंपिक विज़न को ध्यान में रखते हुए कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें-
शैक्षणिक संस्थानों में हाई-परफॉर्मेंस सेंटर की स्थापना
खेल विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका
टैलेंट आइडेंटिफिकेशन
लॉन्ग-टर्म एथलीट डेवलपमेंट
कोचिंग उत्कृष्टता
इंटीग्रेटेड स्पोर्ट सिस्टम और डेटा आधारित मॉनिटरिंग
जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
एंटी-डोपिंग और खेल पोषण
सम्मेलन के दौरान विशेष सत्र “India Leading the Way: Anti-Doping Reforms and Evidence-Based Sports Nutrition for Olympic Excellence” भी आयोजित किया गया, जिसमें NADA, NDTL, खेल पोषण विशेषज्ञों और खेल वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस सत्र में एंटी-डोपिंग शिक्षा, वैज्ञानिक पोषण और प्रदर्शन सुधार कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला गया।
सम्मान एवं समापन
सम्मेलन के दौरान शोधकर्ताओं के लिए पेपर प्रेज़ेंटेशन आयोजित किए गए, जबकि शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को पीईएफआई के 8वें राष्ट्रीय पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया गया।
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा मंत्रालय समर्थित संस्थानों के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन स्कूल स्तर से एक सशक्त शारीरिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीति संवाद सिद्ध हुआ। इस सम्मेलन ने नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और जमीनी कार्यकर्ताओं को एक साझा मंच पर लाकर भारत की 2036 ओलंपिक दृष्टि को ठोस आधार प्रदान किया।
