कैंसर की सत्रह दवाओं पर कस्टम्स ड्यूटी हटाकर और बायोफार्मा शक्ति मिशन की शुरुआत

 कैंसर की सत्रह दवाओं पर कस्टम्स ड्यूटी हटाकर और बायोफार्मा शक्ति मिशन की शुरुआत
नई दिल्ली। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेंटर्स की क्षमता 50 फीसदी बढ़ाई जाएगी, ताकि आपात स्थिति में बेहतर इलाज मिल सके।
1 फरवरी 2026 को पेश हुए केंद्रीय बजट में हेल्थ केयर को काफी अहमियत दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई ऐसे ऐलान किए जो मरीजों की जेब पर बोझ कम करेंगे और देश में दवाओं व इलाज की सुविधाओं को मजबूत बनाएंगे। खास तौर पर कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने पर जोर रहा। साथ ही, घरेलू बायोफार्मा इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बड़ी रकम देने का ऐलान किया है।
कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए बजट में राहत की बड़ी खबर आई है। सरकार ने 17 तरह के कैंसर में इस्तेमाल होने वाली मुख्य दवाओं पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी पूरी तरह हटा दी है। इससे ये दवाएं काफी सस्ती हो जाएंगी और मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा, सात और दुर्लभ बीमारियों को शामिल किया गया, जहां व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए दवाएं, मेडिसिन्स और स्पेशल मेडिकल फूड (FSMP) पर आयात ड्यूटी से छूट मिलेगी।
हेल्थ केयर सुविधाओं पर बड़ा दांव
बजट में सबसे चर्चित ऐलान ‘बायोफार्मा शक्ति मिशन’ रहा। इस पर 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जो अगले पांच सालों में चलेगा। मकसद है देश में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स की घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना। ये दवाएं कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों के इलाज में अहम हैं। इससे भारत को ग्लोबल बायोफार्मा हब बनाने में मदद मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
इसके अलावा वित्त मंत्री ने कहा कि अगले पांच सालों में लगभग 1 लाख नए एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHPs) तैयार किए जाएंगे। इनमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलॉजी, एनेस्थेसिया और एप्लाइड साइकोलॉजी जैसी फील्ड्स शामिल हैं।
वित्तमंत्री सीतारमण ने लोकसभा में बताया कि मौजूदा AHP संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा और नए संस्थान निजी और सरकारी सेक्टर में खोले जाएंगे। इससे युवाओं के लिए हेल्थ सेक्टर में अच्छे करियर के मौके बढ़ेंगे। उन्होंने कहा, “यह योजना 10 प्रमुख फील्ड्स को कवर करेगी और अगले पांच साल में 1 लाख नए AHPs तैयार किए जाएंगे।”
इसके साथ ही बुजुर्गों और स्वास्थ्य सेवा में काम करने वाले लोगों के लिए एक मजबूत केयर सिस्टम भी तैयार किया जाएगा। राष्ट्रीय स्किल्स फ्रेमवर्क के तहत कई ट्रेनिंग प्रोग्राम बनाए जाएंगे, जहां केयरगिवर्स को वेलनेस, योग और मेडिकल डिवाइस चलाने जैसी स्किल्स सिखाई जाएंगी। अगले साल 1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेन किया जाएगा।
इसके अलावा जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेंटर्स की क्षमता 50 फीसदी बढ़ाई जाएगी, ताकि आपात स्थिति में बेहतर इलाज मिल सके। अगले पांच सालों में 1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी, जो घर पर ही लंबे समय तक देखभाल करने में मदद करेंगे।
पांच रीजनल मेडिकल हब्स PPP मोड में बनेंगे, जो डॉक्टरों और अलाइड हेल्थ वर्कर्स के लिए नौकरियां पैदा करेंगे। तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा खोले जाएंगे, ताकि पारंपरिक चिकित्सा में पढ़ाई, रिसर्च और इलाज मजबूत हो। AYUSH फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैब्स को अपग्रेड किया जाएगा। जामनगर में WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को और मजबूत किया जाएगा, जहां रिसर्च, ट्रेनिंग और जागरूकता पर काम होगा।
बजट पर एक्सपर्ट की राय  
बजट पर एक्सपर्ट ने बताया कि बजट 2026 ने हेल्थकेयर की किफायती और आसान पहुंच की दिशा में अहम कदम उठाया है। 17 तरह की जरूरी कैंसर दवाओं पर कस्टम्स ड्यूटी हटाना सराहनीय है, जिससे इलाज की लागत सीधे कम होगी और मरीजों व उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव घटेगा। यह मरीजों की भलाई और जीवनरक्षक इलाज तक पहुंच पर सरकार के मजबूत फोकस को दर्शाता है।