ईरान की धमकी, अमेरिकी युद्धपोत के पास करेगा दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास
- दिल्ली राजनीति राष्ट्रीय विदेश
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- January 31, 2026
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दुबई। अमेरिका ने ईरान की तरफ से अपना सबसे बड़ा बेड़ा भेजा है, जिससे पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। वहीं ईरान ने भी मोर्चा संभालते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की है। इस पर अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमान ने ईरानी सेना को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वह अमेरिकी युद्धपोतों के ऊपर से उड़ान भरने जैसे असुरक्षित युद्धाभ्यास को बर्दाश्त नहीं करेगा, जिसमें अमेरिकी जहाजों से टक्कर की दिशा में ईरानी स्पीडबोटों का आना भी शामिल है।
बातचीत के लिए तैयार है ईरान- अराघची
वहीं इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश निष्पक्ष और न्यायसंगत बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने ट्रंप की मुख्य मांगों को खारिज कर दिया। अराघची ने कहा कि रक्षा रणनीतियां और मिसाइल प्रणालियां कभी भी बातचीत का विषय नहीं होंगी।
ईरान का दावा
ईरान की तरफ से ये भी दावा किया गया है कि हाल ही में हुए 12-दिवसीय युद्ध से उसकी सैन्य क्षमताएं पहले से ज्यादा मजबूत हुई हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, सेना प्रमुख अमीर हातमी ने एक सैन्य समारोह में कहा कि इस संघर्ष से ईरानी सेना को अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने का मौका मिला, साथ ही विरोधी पक्ष की रणनीति को भी बेहतर ढंग से परखा गया। हातमी के अनुसार, इस युद्ध के बाद ईरान की मिसाइल प्रणाली, हवाई रक्षा और समग्र सैन्य क्षमता पहले से बेहतर और मजबूत स्थिति में है। उन्होंने इसे ईरान के लिए अनूठा अनुभव बताया, जिससे भविष्य में किसी भी हमले से निपटने की तैयारी और पुख्ता हुई है।
वहीं इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश निष्पक्ष और न्यायसंगत बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने ट्रंप की मुख्य मांगों को खारिज कर दिया। अराघची ने कहा कि रक्षा रणनीतियां और मिसाइल प्रणालियां कभी भी बातचीत का विषय नहीं होंगी।
ईरान का दावा
ईरान की तरफ से ये भी दावा किया गया है कि हाल ही में हुए 12-दिवसीय युद्ध से उसकी सैन्य क्षमताएं पहले से ज्यादा मजबूत हुई हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, सेना प्रमुख अमीर हातमी ने एक सैन्य समारोह में कहा कि इस संघर्ष से ईरानी सेना को अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने का मौका मिला, साथ ही विरोधी पक्ष की रणनीति को भी बेहतर ढंग से परखा गया। हातमी के अनुसार, इस युद्ध के बाद ईरान की मिसाइल प्रणाली, हवाई रक्षा और समग्र सैन्य क्षमता पहले से बेहतर और मजबूत स्थिति में है। उन्होंने इसे ईरान के लिए अनूठा अनुभव बताया, जिससे भविष्य में किसी भी हमले से निपटने की तैयारी और पुख्ता हुई है।
