मोहन भागवत के बयान ने देश में नई सियासी बहस छेड़ी
मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के एक ताजा बयान ने देश में नई सियासी बहस छेड़ दी है। मध्य महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के गंगापुर में आयोजित ‘हिंदू सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में यदि कुछ भी अच्छा या बुरा घटित होता है, तो उसके लिए हिंदू समाज ही जिम्मेदार माना जाएगा। उनके इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
हिंदुओं को लेकर भागवत की बड़ी बातें: सम्मेलन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि भारत की नियति और दशा-दिशा सीधे तौर पर हिंदू समाज के आचरण और एकजुटता से जुड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में होने वाली हर घटना के लिए हिंदुओं से ही सवाल पूछा जाएगा। भागवत ने हिंदू समाज को संगठित रहने और राष्ट्र निर्माण में अपनी जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया।
विपक्ष का पलटवार और सियासी संग्राम: मोहन भागवत के इस बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी नेताओं ने भागवत के बयान को घेरते हुए वाराणसी के मणिकर्णिका घाट और अन्य मुद्दों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के बयानों से समाज में ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, एनडीए (NDA) के घटक दलों और भाजपा नेताओं ने मोहन भागवत के बयान का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रवाद और सामाजिक उत्तरदायित्व से प्रेरित बताया है।
