देश के विकास में बाधक आरएसएस’ : प्रियांक खरगे
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- January 6, 2026
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बंगलूरू। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को देश के विकास में सबसे बड़ा रोड़ा बताया। प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दायर कानूनी मामले संगठन के बारे में उनकी ओर से उठाए गए सवालों की प्रतिक्रिया हैं।
प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अखबार का लेख साझा किया, जिसमें बताया गया था कि एक आरएसएस सदस्य की ओर से दायर मानहानि की शिकायत के मामले में एक विशेष अदालत ने उन्हें और राज्य के साथी मंत्री दिनेश गुंडू राव को नोटिस जारी किया है।
अपने पोस्ट में खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संगठन अपने स्वयंसेवकों के चंदे से चलता है। इस दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा।
‘कठपुतलियों से दर्ज करवा रहे मामले’
उन्होंने कहा, ‘कुछ चुनिंदा लोगों का समूह अपने कठपुतलियों का इस्तेमाल करके हमारे खिलाफ मामले दर्ज करवा रहा है, सिर्फ इसलिए कि हम आरएसएस पर जायज सवाल उठा रहे हैं। आरएसएस राष्ट्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।’ उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘मोहन भागवत ने कहा है कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों के दिए गए दान से चलता है। हालांकि, इस दावे के संबंध में कई जायज सवाल उठते हैं: ये स्वयंसेवक कौन हैं और इनकी पहचान कैसे होती है? दिए गए दान का पैमाना और स्वरूप क्या है? ये दान किन तरीकों या माध्यमों से प्राप्त होते हैं?’
अपने पोस्ट में खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संगठन अपने स्वयंसेवकों के चंदे से चलता है। इस दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा।
‘कठपुतलियों से दर्ज करवा रहे मामले’
उन्होंने कहा, ‘कुछ चुनिंदा लोगों का समूह अपने कठपुतलियों का इस्तेमाल करके हमारे खिलाफ मामले दर्ज करवा रहा है, सिर्फ इसलिए कि हम आरएसएस पर जायज सवाल उठा रहे हैं। आरएसएस राष्ट्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।’ उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘मोहन भागवत ने कहा है कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों के दिए गए दान से चलता है। हालांकि, इस दावे के संबंध में कई जायज सवाल उठते हैं: ये स्वयंसेवक कौन हैं और इनकी पहचान कैसे होती है? दिए गए दान का पैमाना और स्वरूप क्या है? ये दान किन तरीकों या माध्यमों से प्राप्त होते हैं?’
