चीन में एक बंदर की कीमत 25 लाख रुपये, खरीदने को लेकर मारामारी
- राष्ट्रीय विदेश
Political Trust
- January 4, 2026
- 0
- 172
- 1 minute read
बीजिंग। चीन में हर साल 25 हजार बंदरों का इस्तेमाल बाय परीक्षण के लिए किया जा रहा है। इस बार सरकार ने वैक्सीन और मेडिसिन के परीक्षण पर जोर दे दिया है, जिसके कारण बंदरों की कमी हो गई है। चीन में बंदर 25-25 लाख रुपए में बिक रहे हैं।
चीन में नए साल पर बंदरों की डिमांड में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है। कुछ हजार में बिकने वाले बंदर अब बीजिंग के आसपास 25-25 लाख रुपए में बिक रहे हैं। दिलचस्प बात है कि इतनी महंगी कीमत पर बंदर खुद जिनपिंग सरकार की सरकारी एजेंसियां भी खरीद रही हैं। सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बंदरों के प्रजनन बढ़ाने में मदद करें।
चीन में प्राकृतिक तौर पर बंदरों के पालन-पोषण के अलावा बाय केमिकल तरीकों से भी प्रजनन कराया जाता है। चीन के एनएचपी प्रजनन और विकास संघ के अनुसार साल 2018 में इसकी शुरुआत की गई थी। साल 2021 में चीन में सबसे ज्यादा 30,000 बंदरों का प्रजनन किया गया थां
25-25 लाख रुपए में बिक रहे बंदर
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक चीन में वर्तमान में 25-25 लाख रुपए में एक बंदर बिक रहा है। 2021 में भी चीन में बंदर इसी कीमत पर बिक रहे थे, जब कोरोना वैक्सीन निर्माण चल रहा था। इसके बाद चीन में बंदरों की मांग में कमी आ गई थी, लेकिन 5 साल बाद फिर चीन में बंदरों की डिमांड में बढ़ोतरी हुई है।
चीन के लैब से बंदर खरीदने को लेकर मारामारी की स्थिति है। कुछ दवा कंपनियां बाहर से भी बंदर खरीद रही है। कहा जा रहा है कि स्थिति अगर बिगड़ेगी तो पिछली बार की तरह ही चीन में बंदरों की तस्करी में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। 2021 में चीन में जब बंदरों की कमी आई थी, तब कंबोडिया से तस्करी कर आपूर्ति की खाई को पाटा गया था।
चीन में बंदरों की डिमांड में बढ़ोतरी क्यों?
चीन की सरकार ने मेडिकल उद्योग में दुनिया को पछाड़ने के लिए नए-नए प्रयोग का आह्वान किया है। इसी के तहत चीन की कई कंपनियां मेडिसिन और वैक्सीन परीक्षण कर रही हैं। 2025 में एमपोक्स, कोरोना, कैंसर वैक्सीन का परीक्षण किया गया था। इसी तरह चीन में उम्र बढ़ाने को लेकर भी वैक्सीन का परीक्षण किया जा रहा है। इन परीक्षणों में बंदरों की जरूरत होती है। इस बार परीक्षणों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जबकि चीन में बंदरों की संख्या में कमी आई है, जिसके कारण बंदरों की डिमांड बढ़ गई है। इसका असर कीमत पर भी देखने को मिल रहा है।
सिक्सटोन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में औसतन हर साल 25 हजार बंदरों पर वैक्सीन ट्रायल किया जाता है। इस बार ट्रायल संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण चीन में बंदरों के दाम बढ़ गए हैं।
चीन में प्राकृतिक तौर पर बंदरों के पालन-पोषण के अलावा बाय केमिकल तरीकों से भी प्रजनन कराया जाता है। चीन के एनएचपी प्रजनन और विकास संघ के अनुसार साल 2018 में इसकी शुरुआत की गई थी। साल 2021 में चीन में सबसे ज्यादा 30,000 बंदरों का प्रजनन किया गया थां
25-25 लाख रुपए में बिक रहे बंदर
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक चीन में वर्तमान में 25-25 लाख रुपए में एक बंदर बिक रहा है। 2021 में भी चीन में बंदर इसी कीमत पर बिक रहे थे, जब कोरोना वैक्सीन निर्माण चल रहा था। इसके बाद चीन में बंदरों की मांग में कमी आ गई थी, लेकिन 5 साल बाद फिर चीन में बंदरों की डिमांड में बढ़ोतरी हुई है।
चीन के लैब से बंदर खरीदने को लेकर मारामारी की स्थिति है। कुछ दवा कंपनियां बाहर से भी बंदर खरीद रही है। कहा जा रहा है कि स्थिति अगर बिगड़ेगी तो पिछली बार की तरह ही चीन में बंदरों की तस्करी में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। 2021 में चीन में जब बंदरों की कमी आई थी, तब कंबोडिया से तस्करी कर आपूर्ति की खाई को पाटा गया था।
चीन में बंदरों की डिमांड में बढ़ोतरी क्यों?
चीन की सरकार ने मेडिकल उद्योग में दुनिया को पछाड़ने के लिए नए-नए प्रयोग का आह्वान किया है। इसी के तहत चीन की कई कंपनियां मेडिसिन और वैक्सीन परीक्षण कर रही हैं। 2025 में एमपोक्स, कोरोना, कैंसर वैक्सीन का परीक्षण किया गया था। इसी तरह चीन में उम्र बढ़ाने को लेकर भी वैक्सीन का परीक्षण किया जा रहा है। इन परीक्षणों में बंदरों की जरूरत होती है। इस बार परीक्षणों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जबकि चीन में बंदरों की संख्या में कमी आई है, जिसके कारण बंदरों की डिमांड बढ़ गई है। इसका असर कीमत पर भी देखने को मिल रहा है।
सिक्सटोन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में औसतन हर साल 25 हजार बंदरों पर वैक्सीन ट्रायल किया जाता है। इस बार ट्रायल संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण चीन में बंदरों के दाम बढ़ गए हैं।
