आर्थिक तनाव और रुपये में गिरावट के बीच आरबीआई जोखिम कवच किया दोगुना

 आर्थिक तनाव और रुपये में गिरावट के बीच आरबीआई जोखिम कवच किया दोगुना
नई दिल्ली। दुनिया भर में बढ़ते आर्थिक तनाव, महंगे कच्चे तेल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने देश की अर्थव्यवस्था को संभावित संकटों से बचाने के लिए अपने जोखिम कवच यानी ‘रिस्क बफर’ को दोगुना से ज्यादा बढ़ा दिया है। आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.09 लाख करोड़ रुपये जोखिम प्रावधान में रखने का फैसला किया है। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 44,900 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस फैसले को भारत की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। आरबीआई ने साफ संकेत दिया है कि वह वैश्विक और घरेलू आर्थिक जोखिमों को हल्के में नहीं ले रहा। दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। ईरान संकट और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता से भी दबाव बढ़ा है। ऐसे हालात में अगर अचानक बड़ा आर्थिक झटका लगता है तो केंद्रीय बैंक को मजबूत वित्तीय सुरक्षा की जरूरत पड़ती है। इसी कारण आरबीआई ने अपनी बैलेंस शीट को ज्यादा सुरक्षित बनाने का फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक ने कंटिंजेंट रिस्क बफर को बैलेंस शीट के 6.5 फीसदी पर बनाए रखा है। हालांकि पिछले साल यह 7.5 फीसदी था, लेकिन आरबीआई की कुल बैलेंस शीट 20.6 फीसदी बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसी वजह से जोखिम प्रावधान की राशि भी तेजी से बढ़ गई।