सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की किताब को लेकर बदला अपना फैसला

 सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की किताब को लेकर बदला अपना फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का एक अध्याय लिखने के मामले में अपने पहले के आदेश में बदलाव किया है। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के एक अध्याय पर हुए विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि जिन तीन शिक्षाविदों ने इसे लिखा है, उन्हें हटा दिया जाए और दोबारा काम न दिया जाए। अब चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों और सार्वजनिक यूनिवर्सिटी और केंद्र और राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले संस्थानों को इस मुद्दे पर स्वतंत्र रुप से फैसला करने की छूट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके 11 मार्च के आदेश में की गई उसकी टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना फैसला कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च के आदेश के उस हिस्से को भी वापस ले लिया है जिसमें कहा गया था कि तीन शिक्षाविदों ने कक्षा आठ के छात्रों के सामने न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश करने के उद्देश्य से जानबूझकर और सोच-समझकर तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया था। कोर्ट ने उन तीन लोगों की याचिका पर ये फैसला किया जिन्हें कोर्ट ने इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। याचिकाकर्ताओं ने अपने खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी।
दरअसल, 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए जिम्मेदार जिन लोगों को सरकारी कामों से हटाने का आदेश दिया था उनमें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार शामिल थे। इन्हीं तीनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।