इस माह पड़ेगे दो प्रदोष व्रत, जाने शुभ मुहूर्त और महत्व
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- May 11, 2026
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नई दिल्ली। मई 2026 का महीना भगवान शिव की भक्ति करने वालों के लिए बेहद खास रहने वाला है। इस महीने दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं, जिन्हें करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है। प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने का सबसे श्रेष्ठ व्रत माना जाता है।
मई 2026 में कब-कब हैं प्रदोष व्रत
मई महीने का पहला प्रदोष व्रत 14 मई 2026 को रखा जाएगा। यह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रहा है। गुरुवार के दिन होने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
दूसरा प्रदोष व्रत 28 मई 2026 को रखा जाएगा। यह ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ेगा। खास बात यह है कि यह भी गुरुवार के दिन पड़ रहा है, जिससे इस महीने दो गुरु प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
14 मई को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ समय शाम 07 बजकर 04 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक रहेगा।
वहीं 28 मई को पूजा का मुहूर्त शाम 07 बजकर 12 मिनट से रात 09 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा संध्या समय यानी प्रदोष काल में करना सबसे फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत के नियम क्या हैं
प्रदोष व्रत के दिन फलाहार या सात्विक भोजन करना चाहिए। इस दिन क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहना जरूरी होता है। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।
जरूरतमंदों को दान देना इस दिन विशेष फल देता है। साथ ही भगवान शिव की पूजा पूरे विधि विधान से करनी चाहिए ताकि व्रत का पूरा लाभ मिल सके।
प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं। इस समय पूजा करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।
यह व्रत जीवन की समस्याओं को दूर करने, कर्ज से मुक्ति पाने और ग्रह दोष शांत करने में भी लाभकारी माना जाता है। नियमित रूप से प्रदोष व्रत करने से आध्यात्मिक उन्नति भी होती है।
मई 2026 में आने वाले दोनों प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का सुनहरा अवसर हैं। सही समय और नियमों के साथ व्रत करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मई महीने का पहला प्रदोष व्रत 14 मई 2026 को रखा जाएगा। यह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रहा है। गुरुवार के दिन होने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
दूसरा प्रदोष व्रत 28 मई 2026 को रखा जाएगा। यह ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ेगा। खास बात यह है कि यह भी गुरुवार के दिन पड़ रहा है, जिससे इस महीने दो गुरु प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
14 मई को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ समय शाम 07 बजकर 04 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक रहेगा।
वहीं 28 मई को पूजा का मुहूर्त शाम 07 बजकर 12 मिनट से रात 09 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा संध्या समय यानी प्रदोष काल में करना सबसे फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत के नियम क्या हैं
प्रदोष व्रत के दिन फलाहार या सात्विक भोजन करना चाहिए। इस दिन क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहना जरूरी होता है। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।
जरूरतमंदों को दान देना इस दिन विशेष फल देता है। साथ ही भगवान शिव की पूजा पूरे विधि विधान से करनी चाहिए ताकि व्रत का पूरा लाभ मिल सके।
प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं। इस समय पूजा करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं।
यह व्रत जीवन की समस्याओं को दूर करने, कर्ज से मुक्ति पाने और ग्रह दोष शांत करने में भी लाभकारी माना जाता है। नियमित रूप से प्रदोष व्रत करने से आध्यात्मिक उन्नति भी होती है।
मई 2026 में आने वाले दोनों प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का सुनहरा अवसर हैं। सही समय और नियमों के साथ व्रत करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
