महिला सुरक्षा: सख्त कानून और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव-ज्योति स्वरूप गौड़
नई दिल्ली -आज के आधुनिक और तेज़ी से बदलते भौतिकवादी दौर में महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बनकर उभरी है। खासकर दिल्ली जैसे भीड़भाड़ वाले महानगर में महिलाओं को घर, दफ्तर, बाजार, स्कूल-कॉलेज और सोशल मीडिया तक हर जगह चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जहां एक ओर सख्त कानून बनाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाओं का खुद सतर्क और जागरूक रहना भी उतना ही जरूरी है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए देश में कई प्रभावी कानून लागू हैं। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए POSH एक्ट 2013 लागू है, जिसके तहत अश्लील टिप्पणी, छेड़छाड़, अनचाहा स्पर्श और आपत्तिजनक मैसेज अपराध माने जाते हैं। घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 महिलाओं को घर के अंदर होने वाली शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से सुरक्षा देता है। वहीं, आईटी एक्ट 2000 के तहत ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर स्टॉकिंग और अश्लील सामग्री से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है।
महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई पहल भी शुरू की हैं। संवेदनशील इलाकों में पिंक पेट्रोलिंग के जरिए महिला पुलिसकर्मी गश्त करती हैं। हर थाने में महिला हेल्प डेस्क की सुविधा उपलब्ध है, जहां 24 घंटे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ‘हिम्मत प्लस’ ऐप के जरिए आपात स्थिति में SOS बटन दबाते ही पुलिस को लोकेशन मिल जाती है। इसके अलावा स्कूल-कॉलेजों में छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
किसी भी प्रकार की घटना होने पर महिलाएं नजदीकी थाने में FIR दर्ज करा सकती हैं। जीरो FIR की सुविधा के तहत घटना कहीं भी हुई हो, किसी भी थाने में शिकायत दर्ज की जा सकती है। साइबर अपराध के मामलों में www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत की सुविधा भी उपलब्ध है।
कानून में भी ऐसे अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है। छेड़छाड़ के मामलों में 1 से 5 साल तक की सजा हो सकती है, यौन उत्पीड़न पर 1 से 3 साल की सजा, स्टॉकिंग पर पहली बार 3 साल और दोबारा अपराध करने पर 5 साल तक की सजा दी जा सकती है। अश्लील टिप्पणी या इशारे करने पर भी 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।
आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर भी खतरे बढ़े हैं, जैसे फेक प्रोफाइल, अश्लील मैसेज, फोटो मॉर्फिंग, साइबर स्टॉकिंग और ब्लैकमेलिंग। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपने सोशल मीडिया अकाउंट को प्राइवेट रखें, अनजान लोगों से दूरी बनाए रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।
महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी सावधानियां भी अपनानी चाहिए, जैसे देर रात यात्रा के दौरान परिवार को जानकारी देना, किसी भी तरह के सबूत जैसे मैसेज या कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और असहज स्थिति में तुरंत ‘ना’ कहकर दूरी बना लेना। जरूरत पड़ने पर 1091 या 112 पर तुरंत संपर्क करना चाहिए।
महिला सुरक्षा केवल कानून या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। जागरूकता, सतर्कता और सही समय पर उठाया गया कदम ही महिलाओं को सुरक्षित वातावरण दे सकता है।
