कच्चे तेल की दरों में वृद्धि से थोक महंगाई 3.88 फीसदी पर पहुंची
- कारोबार दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- April 15, 2026
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नई दिल्ली। देश में थोक महंगाई पांचवें महीने मार्च 2026 में 3.88 फीसदी पर पहुंच गई है। यह फरवरी के 2.13 फीसदी और मार्च 2025 के 2.25 फीसदी से काफी अधिक है। आज जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे मुख्य वजह ईंधन, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कीमतों का तेज उछाल है। उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा कि मार्च में महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही।
ईंधन और कच्चे तेल में बड़ा उछाल
WPI आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई फरवरी के -3.78 फीसदी (गिरावट) से बढ़कर मार्च में 1.05 फीसदी हो गई। खासतौर पर कच्चे तेल (क्रूड पेट्रोलियम) में महंगाई 51.57 फीसदी तक पहुंच गई, जो फरवरी में -1.29 फीसदी थी।
लेकिन खाने-पीने की रफ्तार धीमी
एक तरफ जहां थोक स्तर पर कई चीजें महंगी हुई हैं, वहीं खाने-पीने के मामले में थोड़ी राहत देखने को मिली है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की रफ्तार फरवरी के 2.19 प्रतिशत से घटकर मार्च में 1.90 प्रतिशत पर आ गई। सब्जियों की महंगाई दर भी घटी है, जो फरवरी में 4.73 प्रतिशत थी और मार्च में घटकर 1.45 प्रतिशत रह गई।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति में मामूली बढ़ोतरी हुई है। यह मार्च में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले महीने यह 3.21 प्रतिशत थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने की वजह से हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरें तय करने के लिए इसी खुदरा महंगाई पर नजर रखता है। अर्थव्यवस्था की इसी स्थिति को देखते हुए, आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
खाने के सामान पर महंगाई: 1.90%
सब्जियों पर महंगाई: 1.45%
पश्चिम एशिया संकट का असर
अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है। 28 फरवरी से अब तक कच्चे तेल के दाम 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। एक महीने के भीतर कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
WPI आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई फरवरी के -3.78 फीसदी (गिरावट) से बढ़कर मार्च में 1.05 फीसदी हो गई। खासतौर पर कच्चे तेल (क्रूड पेट्रोलियम) में महंगाई 51.57 फीसदी तक पहुंच गई, जो फरवरी में -1.29 फीसदी थी।
लेकिन खाने-पीने की रफ्तार धीमी
एक तरफ जहां थोक स्तर पर कई चीजें महंगी हुई हैं, वहीं खाने-पीने के मामले में थोड़ी राहत देखने को मिली है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि की रफ्तार फरवरी के 2.19 प्रतिशत से घटकर मार्च में 1.90 प्रतिशत पर आ गई। सब्जियों की महंगाई दर भी घटी है, जो फरवरी में 4.73 प्रतिशत थी और मार्च में घटकर 1.45 प्रतिशत रह गई।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति में मामूली बढ़ोतरी हुई है। यह मार्च में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले महीने यह 3.21 प्रतिशत थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने की वजह से हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरें तय करने के लिए इसी खुदरा महंगाई पर नजर रखता है। अर्थव्यवस्था की इसी स्थिति को देखते हुए, आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
खाने के सामान पर महंगाई: 1.90%
सब्जियों पर महंगाई: 1.45%
पश्चिम एशिया संकट का असर
अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है। 28 फरवरी से अब तक कच्चे तेल के दाम 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। एक महीने के भीतर कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
