गाड़ी पर अवैध रूप से वीआईपी बत्तियां लगाने पर कटेगा चालान, ट्रैफिक पुलिस करेगी कानूनी कार्रवाई

 गाड़ी पर अवैध रूप से वीआईपी बत्तियां लगाने पर कटेगा चालान, ट्रैफिक पुलिस करेगी कानूनी कार्रवाई
नई दिल्ली। सड़क पर वीआईपी जैसा अनुभव पाने के लिए अपनी गाड़ी पर अवैध बत्तियां न लगाएं। केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियम तोड़ने पर ट्रैफिक पुलिस न केवल चालान काट सकती है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। 2017 में सरकार की ओर से वीआईपी कल्चर को खत्म करने के बाद, प्राइवेट वाहनों पर लाल या नीली बत्ती का इस्तेमाल पूरी तरह अवैध है। यह सुविधा केवल इमरजेंसी सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के लिए आरक्षित है। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के उल्लंघन पर पुलिस मोटर वाहन अधिनियम की धारा 108 के तहत भारी जुर्माना लगा सकती है और वाहन को जब्त भी कर सकती है।
केंद्र सरकार ने 2017 में वीआईपी कल्चर को जड़ से मिटाने के लिए एतिहासिक फैसला लेते हुए सभी मंत्रियों और अधिकारियों की गाड़ियों से लाल बत्ती हटा दी थी। इसका मकसद सड़क पर एक समानता का माहौल बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करना था।
बत्ती लगाने का अधिकार किसे है?
इमरजेंसी सेवाएं
केवल एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसे सरकारी वाहनों को ही नीली या लाल बत्ती का उपयोग करने की अनुमति है।
आम नागरिक
किसी भी निजी वाहन पर किसी भी तरह की फ्लैशर लाइट, लाल या नीली बत्ती का उपयोग करना गैर-कानूनी है।
कवर करना अनिवार्य
अगर कोई अधिकृत व्यक्ति सरकारी कार्य के लिए भी गाड़ी में मौजूद नहीं है, तो उस स्थिति में भी बत्ती को कवर करना अनिवार्य होता है।
क्या है जुर्माना और कार्रवाई?
अगर कोई ट्रैफिक पुलिस के नियमों को तोड़ता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भारी जुर्माना:
मोटर वाहन अधिनियम के तहत भारी चालान काटा जाएगा।
गाड़ी सीज:
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वाहन को तुरंत जब्त यानी सीज भी किया जा सकता है।
अवैध लाइट्स:
मौके पर ही गाड़ी से अवैध लाइट्स को हटवाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती:
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इन लाइटों का दुरुपयोग सड़क पर डर और भ्रम पैदा करता है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।