भारतीय रेल: 2030 तक तीन हजार मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता का लक्ष्य

 भारतीय रेल: 2030 तक तीन हजार मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता का लक्ष्य
नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने में भारतीय रेलवे की भूमिका आने वाले वर्षों में और ज्यादा अहम होने वाली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश ने 2030 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। जिसमें रेलवे की बड़ी भूमिका होगी।
एसोचैम-एईएससीएलए की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है। जो आगे बढ़ने की बड़ी संभावनाएं दिखाती है। रेलवे सेक्टर इस समय तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाओं और लगभग पूरी हो चुकी विद्युतीकरण प्रक्रिया से रेलवे की कार्यक्षमता बढ़ी है और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी मजबूत हुई है। इन सुधारों की वजह से अब माल ढुलाई पहले से ज्यादा तेज, सस्ती और भरोसेमंद हो रही है।
जीडीपी में रेलवे की हिस्सेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए क्षमता बढ़ाना, फ्रेट कॉरिडोर का विस्तार, निजी क्षेत्र की भागीदारी और बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर खास ध्यान देना जरूरी है। साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना भी बेहद जरूरी है। फिलहाल यह देश की जीडीपी का करीब 7.97 फीसदी है।अगर इस लागत को कम किया जाता है, तो भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मजबूत होगी और अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।
भारत रेलवे हर साल कितनी माल ढुलाई कर रहा?
भारतीय रेलवे पहले ही हर साल 1.6 अरब टन से ज्यादा माल ढुलाई कर रहा है और आने वाले समय में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, नीतिगत सुधार और डिजिटलीकरण की वजह से रेलवे सेक्टर देश की आर्थिक प्रगति का एक मजबूत आधार बनता जा रहा है।