जयपुर कृषि कॉन्फ्रेंस: खेती के लिए नया रोडमैप, फार्मर आईडी और तिलहन–दलहन में आत्मनिर्भरता पर जोर
जयपुर/नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जयपुर में आयोजित रीजनल कृषि कॉन्फ्रेंस के बाद देश की खेती-किसानी को लेकर बड़ा रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि अब देश को अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोनों में बांटकर हर राज्य के लिए अलग कृषि रणनीति बनाई जाएगी, जिससे किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतर विकल्प मिल सकें।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहली बार राष्ट्रीय स्तर की जगह रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं, जिनमें वैज्ञानिक, किसान, एफपीओ और संबंधित संस्थाएं एक मंच पर आकर हर राज्य के लिए अलग रोडमैप तैयार करेंगी। इससे मिट्टी, जलवायु और संसाधनों के आधार पर फसल और तकनीक का चयन आसान होगा।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सभी किसानों को फार्मर आईडी से जोड़ा जा रहा है, जिससे खाद, बीज, फसल बीमा और मुआवजा सीधे और पारदर्शी तरीके से मिलेगा। इससे ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगेगी और टेनेंट किसानों को भी लाभ मिल सकेगा।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत 2024-25 में तिलहन उत्पादन 429.89 लाख टन तक पहुंच गया है। सरकार ने इसे आगे बढ़ाते हुए क्षेत्र को 29 से 33 मिलियन हेक्टेयर और उत्पादन को 69.7 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 10,103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
दलहन मिशन के तहत बीज उत्पादन बढ़ाने, नई किस्मों को बढ़ावा देने और 100 प्रतिशत एमएसपी खरीद की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही देशभर में दाल मिलों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा, ताकि प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिल सके।
विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत 16,000 वैज्ञानिक सीधे किसानों तक नई तकनीक पहुंचाएंगे। इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्राकृतिक खेती और ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन पर भी जोर दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़े।
सरकार नकली बीज, खाद और कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानून लाने की तैयारी में है और सप्लाई चेन की ट्रैकिंग के लिए नया सिस्टम विकसित किया जा रहा है।
आलू, प्याज और टमाटर जैसी फसलों में कीमत गिरने से बचाने के लिए सरकार राज्यों के साथ मिलकर खरीद और सप्लाई की व्यवस्था मजबूत करेगी। ट्रांसपोर्ट और भंडारण का खर्च केंद्र उठाएगा, ताकि किसानों को उचित दाम मिल सके।
फसल क्षति का आकलन अब सैटेलाइट तकनीक से किया जाएगा और फार्मर आईडी के जरिए बीमा और राहत राशि सीधे किसानों तक तेजी से पहुंचेगी। कुल मिलाकर सरकार का फोकस कृषि को आधुनिक, पारदर्शी और लाभकारी बनाने पर है, ताकि किसानों की आय बढ़े और देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।
