खतरे में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स, भारत सरकार का हाई अलर्ट
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव के बीच अब दुनिया के डिजिटल अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। समुद्र के नीचे बिछी सबमरीन केबल्स, जो वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का 99% हिस्सा संभालती हैं, अब युद्ध का नया निशाना बन सकती हैं।
गंभीर खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारत की सभी बड़ी टेलीकॉम कंपनियों (Jio, Airtel, Vi) और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए हाई अलर्ट जारी किया है।
सरकार ने क्यों जारी किया अलर्ट?
हालिया खुफिया इनपुट्स के अनुसार, लाल सागर (Red Sea) और भूमध्य सागर के क्षेत्रों में सक्रिय विद्रोही गुट और कुछ देश इन डेटा केबल्स को काट सकते हैं। भारत के लिए यह इसलिए चिंताजनक है क्योंकि भारत का अधिकांश इंटरनेट डेटा इन्हीं समुद्री रास्तों से होकर यूरोप और अमेरिका तक पहुँचता है।
केबल्स कटने का क्या होगा असर?
अगर मुख्य केबल्स काटी जाती हैं, तो भारत में इंटरनेट की गति बेहद धीमी हो सकती है या कुछ क्षेत्रों में पूरी तरह बंद हो सकता है। डिजिटल ट्रांजैक्शन और शेयर बाजार पूरी तरह ठप पड़ सकते हैं, जिससे अरबों का नुकसान हो सकता है।भारत का विशाल आईटी सेक्टर (Work from Home और क्लाउड सर्विसेज) पूरी तरह चरमरा सकता है।
केंद्र सरकार की टेलीकॉम कंपनियों को सख्त हिदायत
कंपनियों से कहा गया है कि वे डेटा ट्रैफ़िक के लिए ‘बैकअप’ रूट तैयार रखें ताकि एक केबल कटने पर तुरंत दूसरे रास्ते से डेटा भेजा जा सके।केबल्स के लैंडिंग पॉइंट्स (मुंबई और चेन्नई जैसे शहर) पर सुरक्षा और तकनीकी निगरानी बढ़ा दी गई है।सरकार ने कंपनियों को आपात स्थिति के लिए सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं को स्टैंडबाय पर रखने का सुझाव दिया है।
