बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को लोकसभा में घेरा
- दिल्ली राजनीति राष्ट्रीय
Political Trust
- March 27, 2026
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नई दिल्ली। देश में बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी कटौती की है। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी कर दी है। सरकार के इस कदम को आम आदमी के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सियासी गलियारों में इसे लेकर घमासान शुरू हो गया है। विपक्षी सांसदों ने इस फैसले को ‘चुनावी स्टंट’ बताते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती केवल राज्य विधानसभा चुनावों को देखते हुए की गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह राहत वास्तविक नहीं बल्कि असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को देखते हुए जनता को गुमराह करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जब पिछले 12 वर्षों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें सात बार गिरीं, तब सरकार ने आम जनता को इसका लाभ नहीं दिया, बल्कि 21 बार टैक्स में बदलाव कर अपनी तिजोरी भरी।
पवन खेड़ा ने तर्क दिया कि दिल्ली में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब भी उतनी ही बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह कटौती केवल तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए है, न कि आम आदमी की जेब के लिए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि 30 अप्रैल को चुनाव प्रक्रिया खत्म होते ही सरकार फिर से कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर सकती है, जैसा कि पूर्व में भी देखा गया है।
प्रचार की जरूरत क्या है-मनीष
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि राजस्व का असली मालिक जनता है। सरकार जो टैक्स वसूलती है, वह जनता की ही जेब से आता है। अगर सरकार आज उसी टैक्स में थोड़ी कटौती कर रही है, तो वह अपने खजाने से कुछ नहीं दे रही। यह जनता का ही पैसा है जो उन्हें वापस मिल रहा है, तो फिर इसका इतना ढोल पीटने की क्या आवश्यकता है?
पवन खेड़ा ने तर्क दिया कि दिल्ली में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब भी उतनी ही बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यह कटौती केवल तेल कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए है, न कि आम आदमी की जेब के लिए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि 30 अप्रैल को चुनाव प्रक्रिया खत्म होते ही सरकार फिर से कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर सकती है, जैसा कि पूर्व में भी देखा गया है।
प्रचार की जरूरत क्या है-मनीष
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि राजस्व का असली मालिक जनता है। सरकार जो टैक्स वसूलती है, वह जनता की ही जेब से आता है। अगर सरकार आज उसी टैक्स में थोड़ी कटौती कर रही है, तो वह अपने खजाने से कुछ नहीं दे रही। यह जनता का ही पैसा है जो उन्हें वापस मिल रहा है, तो फिर इसका इतना ढोल पीटने की क्या आवश्यकता है?
