कतर में गैस ठिकानों पर हमले से बिलबिलाया अमेरिका, ईरानी तेल पर प्रतिबंध हटाने के संकेत

 कतर में गैस ठिकानों पर हमले से बिलबिलाया अमेरिका, ईरानी तेल पर प्रतिबंध हटाने के संकेत
वाशिंगटन। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था की जड़ें हिला दी हैं। ईरान द्वारा खाड़ी देशों के रणनीतिक ऊर्जा ठिकानों, विशेषकर कतर की रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका अपनी सख्त रणनीति बदलने पर मजबूर होता दिख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरानी तेल पर लगे कड़े प्रतिबंधों में ढील देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया है कि प्रशासन उन जहाजों से प्रतिबंध हटा सकता है जिनमें लगभग 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल पहले से लोड हो चुका है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की किल्लत को रोकना और आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करना है। अमेरिका का मानना है कि इस छूट से वह तेल, जो अभी केवल चीन को रियायती दरों पर मिल रहा था, अब बाजार मूल्य पर एशिया के अन्य देशों तक भी पहुंच सकेगा।
एक तरफ नरमी के संकेत हैं तो दूसरी तरफ तनाव बरकरार है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने कतर की दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी (LNG) सुविधा पर दोबारा हमला किया, तो अमेरिका ईरान के साउथ पार्स गैस भंडारों को पूरी तरह नष्ट कर देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह यू-टर्न वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को बचाने की एक हताश कोशिश है, क्योंकि फारस की खाड़ी में बढ़ते हमलों ने पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है।