व्यापार और किसानों के हितों के बीच संतुलन का काम करेगा भारत अमेरिका समझौता

 व्यापार और किसानों के हितों के बीच संतुलन का काम करेगा भारत अमेरिका समझौता
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच कृषि और व्यापार सहयोग देश के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होगा। किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि ऐसे आयात भारत के बाजार में आनुवंशिक रूप से संशोधित जीएम फसलों के लिए “पिछले दरवाजे” का रास्ता बन सकते हैं। भारत वैश्विक व्यापार के अवसरों और घरेलू कृषि सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।
भारत में जीएम फसलों की स्थिति
भारत ने आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य फसलों के मामले में सावधानीपूर्ण नियामक ढांचा अपनाया है। व्यावसायिक खेती पर काफी हद तक प्रतिबंध है और केवल बीटी कॉटन को बड़े पैमाने पर खेती की अनुमति है। जेनेटिक इंजीनियरिंग से विकसित खाद्य फसलों को अभी भी सख्त स्वीकृति प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
यह ढांचा भारत की व्यापक प्राथमिकताओं को दर्शाता है – जैव विविधता की रक्षा, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसानों की आजीविका की सुरक्षा।
भारत-अमेरिका समझौते का महत्व
भारत की कृषि नीति हमेशा सावधानी और परामर्श पर आधारित रही है। किसान संगठनों, वैज्ञानिकों, नियामकों और व्यापार वार्ताकारों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक होगा। एक संतुलित समझौता भारत को व्यापारिक लाभ दिलाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा मानकों की रक्षा और किसानों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकता है। अंतिम उद्देश्य भारत की कृषि प्रणाली को कमजोर करना नहीं बल्कि उसे मजबूत बनाना है, ताकि देश वैश्विक व्यापार में आत्मविश्वास के साथ भाग ले सके।