सर्वर ने रोकी आनलाइन बुकिंग की रफ्तार, मैनुअल सिस्टम से राहत नहीं

 सर्वर ने रोकी आनलाइन बुकिंग की रफ्तार, मैनुअल सिस्टम से राहत नहीं
गाजियाबाद। आनलाइन एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की रफ्तार को सर्वर ने रोक दिया है। रसोई गैस के लिए एजेंसियों पर सुबह से लाइन लगानी पड़ रही है।  बुकिंग न होने पर केवाईसी पेंडिंग की बात कही जा रही है।
पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध की आग गाजियाबाद में रसोई तक पहुंच गई है। यहां जगह-जगह रसोई-कमर्शियल गैस सिलिंडर और पेट्रोल नहीं मिलने के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं, प्रशासन के लोग स्थिति को संभालने में लगे हुए हैं।
जिले में गैस सिलिंडर की समस्या ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पिछले पांच दिनों से रसोई गैस की किल्लत नजर आ रही है। इसके कारण एजेंसियों पर सुबह से लाइन लग जा रही है और दिनभर उपभोक्ताओं की लाइन लग रही है। सर्वर की समस्या, बुकिंग न होना, केवाईसी पेंडिंग जैसी समस्याओं से उपभोक्ताओं को दो-चार होना पड़ रहा है।
प्रशासन का कहना है कि एजेंसियां लोगों के घरों तक होम डिलीवरी करा रही हैं। बावजूद इसके कुछ उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जो जबरन गैस सिलेंडर क्राइसिस को हवा दे रहे हैं। इनके पास एक सिलेंडर पहले से होने के बावजूद दो और स्टॉक रखने के लिए व्याकुल हैं। इस कारण दिनभर एजेंसियों पर किचकिच हो रही है।
शहर से लेकर गांव तक लगभग हर गैस एजेंसी एक ही समस्या से जूझ रही है, वह है सर्वर क्रैश।
उपभोक्ता घंटों मोबाइल फोन लेकर बैठे हैं, लेकिन आईवीआरएस या ऑनलाइन पोर्टल पर उपभोक्ता आईडी नहीं मिली या नेटवर्क व्यस्त का संदेश मिल रहा है। इससे कारोबार पर भी संकट की स्थिति है। आरडीसी और अन्य प्रमुख स्थलों पर ढाबे और होटलों पर खाना खाने वालों को भोजन के लाले पड़ गए हैं। कई बार आने पर हर बार गैस सिलेंडर आसानी से मिल जाता था, लेकिन इस बार गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण लोग दिन में बिस्कुट, चूड़ा और नमकीन खाते देखे गए।
सीएम हेल्पलाइन पर की शिकायत :
उपभोक्ताओं ने इस अव्यवस्था की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी की है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जहां एक तरफ आम आदमी बुकिंग के लिए तरस रहा है, वहीं कुछ प्रभावशालियों को ऊंचे दामों पर सिलिंडर मुहैया कराए जा रहे हैं।
कोयले के दाम में उछाल, 30 से बढ़कर 35 रुपये हुआ
गैस सिलेंडर की कमी के बीच अब फुटकर बाजार में बिकने वाले कोयले के दाम भी बढ़ गए हैं। पहले करीब 30 रुपये प्रति किलो बिकने वाला कोयला शनिवार को बढ़कर 35 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। अचानक बढ़ी कीमतों ने चाय, हलवाई और छोटे भोजनालय चलाने वालों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उनका रोज़मर्रा का काम इसी पर निर्भर है। कचहरी सर्विस रोड पर चाय की दुकान चलाने वाले बब्बू और मंजू ने बताया कि वे पिछले कई सालों से भट्ठी पर ही चाय बनाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि पहले कभी कोयले के दाम में एक साथ पांच रुपये की बढ़ोतरी नहीं हुई थी। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड ने गैस सिलिंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए अधिकारियों की टीम गठित की है।