व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोक के बाद लखनऊ में खाने-पीने का संकट
- उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय
Political Trust
- March 10, 2026
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लखनऊ। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोक लगा दी गई है। राजधानी में इसका सबसे ज्यादा असर स्ट्रीट फूड वेंडरों, छोटे रेस्टोरेंटों और ढाबा संचालकों पर पड़ेगा। इनके पास रिजर्व रखने के लिए सिलिंडरों की संख्या कम होती है। यहां एक-दो दिन में गैस खत्म हो सकती है। ऐसे में इन पर निर्भर करीब पांच लाख की आबादी के सामने खाने-पीने का संकट पैदा हो सकता है। राजधानी में बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले और नौकरीपेशा लोग हैं। इनके अलावा 25 हजार से ज्यादा विद्यार्थी बाहर से आकर यहां रहते हैं। ये सभी स्ट्रीट फूड वेंडरों, छोटे रेस्टोरेंटों, ढाबा और टिफिन सर्विस पर निर्भर हैं। होटल, रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े चारबाग के अनिल विरमानी बताते हैं कि शहर में शौकिया तौर पर बड़े होटल-रेस्टोरेंट में खाने वालों की बात छोड़ भी दें तो बड़ी संख्या में मजदूरों, कामगारों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के सामने खाने का संकट पैदा हो सकता है। सिलिंडर न मिलने से बड़ी आबादी के भोजन पर बुरा असर पड़ेगा। इसके अलावा व्याव्यायिक सिलिंडर की आपूर्ति रुकने से खानपान से जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी आ सकता है।
छात्रावासों की मेस में सात दिन का गैस रिजर्व
व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोके जाने का असर लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहने वाले दो हजार छात्र-छात्राओं पर पड़ने की आशंका है। इनके रोजाना के भोजन की व्यवस्था मेस पर निर्भर है। फिलहाल मेस में गैस का भंडार सीमित है और ज्यादा से ज्यादा सात दिन तक काम चल सकता है।
लविवि के मुख्य परिसर और जानकीपुरम स्थित नए परिसर को मिलाकर कुल 18 छात्रावास हैं। चीफ प्रोवोस्ट प्रो. अनूप कुमार सिंह ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का गैस आपूर्ति पर इतना असर पड़ेगा, इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। दोनों परिसरों के छात्रावासों में लगभग दो हजार छात्र-छात्राएं मेस में नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन करते हैं।
युद्ध लंबा खिंचा तो बढ़ेंगी मुश्किलें
प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि युद्ध खिंचा और गैस आपूर्ति चालू नहीं की गई तो मेस संचालन में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, विद्यार्थियों को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अन्य व्यवस्था की जाएगी।
व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति पर रोके जाने का असर लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहने वाले दो हजार छात्र-छात्राओं पर पड़ने की आशंका है। इनके रोजाना के भोजन की व्यवस्था मेस पर निर्भर है। फिलहाल मेस में गैस का भंडार सीमित है और ज्यादा से ज्यादा सात दिन तक काम चल सकता है।
लविवि के मुख्य परिसर और जानकीपुरम स्थित नए परिसर को मिलाकर कुल 18 छात्रावास हैं। चीफ प्रोवोस्ट प्रो. अनूप कुमार सिंह ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का गैस आपूर्ति पर इतना असर पड़ेगा, इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। दोनों परिसरों के छात्रावासों में लगभग दो हजार छात्र-छात्राएं मेस में नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन करते हैं।
युद्ध लंबा खिंचा तो बढ़ेंगी मुश्किलें
प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि युद्ध खिंचा और गैस आपूर्ति चालू नहीं की गई तो मेस संचालन में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, विद्यार्थियों को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अन्य व्यवस्था की जाएगी।
