तीन दिवसीय राष्ट्रीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ, विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप प्रस्तुत

 तीन दिवसीय राष्ट्रीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का शुभारंभ, विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप प्रस्तुत

नई दिल्ली, 25 फरवरी 2026। दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय पूसा कृषि विज्ञान मेले का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस अवसर पर उन्होंने खेती-किसानी को विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए व्यापक कृषि सुधारों का रोडमैप प्रस्तुत किया और स्पष्ट संदेश दिया कि अब किसानों के हितों से जुड़ी व्यवस्थाओं में देरी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री ने पौधारोपण कर किया। इस अवसर पर कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एम. एल. जाट, आईएआरआई के निदेशक डॉ. सी. एच. श्रीनिवास राव सहित बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंच पर किसानों को प्रथम पंक्ति में स्थान देकर तथा एक दिव्यांग किसान की व्हीलचेयर स्वयं आगे लाकर मंत्री ने यह संदेश दिया कि नीति निर्माण का केंद्र किसान ही है। कार्यक्रम में सात किसानों को आईएआरआई कृषि अध्येता पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।

कृषि सुधारों पर अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के भुगतान में देरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि यदि किसी एजेंसी या राज्य सरकार द्वारा किसानों का पैसा रोका गया तो उस पर 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा। उन्होंने कहा कि किसान का पैसा सरकारी खातों में रोककर रखने की प्रवृत्ति अब समाप्त होगी। केंद्र सरकार की ओर से देरी नहीं होगी और यदि राज्यों की ओर से भुगतान में विलंब होता है तो केंद्र का हिस्सा सीधे किसान के खाते में भेजने के विकल्प पर काम किया जा रहा है।

कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप, स्प्रिंकलर, पाली हाउस और ग्रीन हाउस जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 18 से अधिक योजनाओं के तहत राज्यों को संसाधन उपलब्ध करा रही है, लेकिन केवल धन जारी करना पर्याप्त नहीं है। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि लाभ वास्तविक किसानों तक पहुँचे। उन्होंने मॉनिटरिंग व्यवस्था को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कृषि विज्ञान केंद्रों को जिला स्तर पर सशक्त इकाई के रूप में विकसित करने की बात करते हुए मंत्री ने कहा कि केवीके अनुसंधान और खेत के बीच सेतु की भूमिका निभाएंगे। नई किस्मों, उन्नत तकनीकों और सफल कृषि मॉडलों को गांव-गांव तक पहुँचाने में केवीके की भूमिका को और मजबूत किया जाएगा।
किसान क्रेडिट कार्ड पर चार प्रतिशत प्रभावी ब्याज दर का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि लगभग 75 प्रतिशत छोटे किसान इसका लाभ ले रहे हैं, लेकिन ऋण वितरण में देरी अस्वीकार्य है। उन्होंने बैंकों से अपेक्षा की कि केसीसी से जुड़े ऋण समयबद्ध और बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के उपलब्ध कराए जाएँ ताकि किसान साहूकारों पर निर्भर न रहें।
कीटनाशक लाइसेंस प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रक्रिया जटिल है और इसमें अनावश्यक विलंब होता है। सरकार इस दिशा में समयसीमा आधारित और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करेगी ताकि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद शीघ्र बाजार में उपलब्ध हों और नकली व घटिया उत्पादों पर रोक लगे।
एमएसपी खरीद प्रक्रिया पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तीन महीने की समयसीमा व्यावहारिक नहीं है। किसान लंबे समय तक अपनी उपज रोककर नहीं रख सकता, इसलिए राज्यों के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए कि अधिकतम एक महीने के भीतर एमएसपी पर खरीद पूरी हो और किसान को तुरंत भुगतान मिले।
खाद सब्सिडी का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार लगभग दो लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिससे 2400 रुपये की वास्तविक लागत वाली यूरिया की बोरी किसान को लगभग 265 से 270 रुपये में मिलती है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस बड़ी सब्सिडी को सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के रूप में देने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि किसान स्वयं निर्णय ले सके और वास्तविक लाभार्थी तक सहायता सुनिश्चित हो।
उन्होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान का भी उल्लेख किया और कहा कि अप्रैल से वैज्ञानिकों की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों को नई शोध उपलब्धियों, कीट प्रबंधन, एकीकृत कृषि मॉडल और निर्यात योग्य किस्मों की जानकारी देंगी, ताकि किसान समय रहते वैज्ञानिक सलाह का लाभ उठा सकें।
केंद्रीय मंत्री ने किसानों को अन्नदाता के साथ जीवनदाता बताते हुए कहा कि किसानों की सेवा भगवान की सेवा के समान है। उन्होंने किसानों से खाद्य और पोषण सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक बाजारों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध कराने का आह्वान किया। पूसा कृषि विज्ञान मेले को उन्होंने किसानों का राष्ट्रीय महाकुंभ बताते हुए कहा कि यह आयोजन प्रयोगशाला से खेत तक ज्ञान पहुंचाने का सशक्त माध्यम है और इसे अगले वर्ष से और व्यापक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा।