एक पौधा प्रति दिन” संकल्प के 5 वर्ष: शिवराज सिंह चौहान ने दिया हर कार्यक्रम की शुरुआत पौधारोपण से करने का आह्वान
नई दिल्ली, 19 फरवरी 2026। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के “एक पौधा प्रति दिन” संकल्प के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर पूसा स्थित एपी शिंदे हॉल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में उनके व्यक्तिगत व्रत को राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वर देने की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा पूसा परिसर में पौधारोपण से हुई।
शिवराज सिंह चौहान ने मंच से घोषणा की कि अब कृषि मंत्रालय, आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालयों, केवीके और ग्रामीण विकास विभाग के सभी कार्यक्रमों की शुरुआत पौधारोपण से की जाएगी। उन्होंने आईसीएआर के महानिदेशक से आग्रह किया कि संस्थान के अंतर्गत होने वाले हर सेमिनार, सम्मेलन और आयोजन का श्रीगणेश पेड़ लगाकर ही हो। विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में भी विद्यार्थियों को पौधारोपण का संकल्प दिलाने की बात कही गई।

उन्होंने अपने स्वागत की परंपरा में भी बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वे अब फूल-मालाएँ या स्मृति चिन्ह स्वीकार नहीं करेंगे। यदि कोई उनका स्वागत करना चाहता है तो स्मृति चिन्ह की बजाय पौधे लगाए और उसकी फोटो भेंट करे। उनके अनुसार पेड़ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सच्ची धरोहर हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने “पेड़ बैंक” की अवधारणा भी प्रस्तुत की, जिसके माध्यम से दानदाता या संस्थाएँ आर्थिक सहयोग देकर पौधारोपण करा सकेंगी और समर्पित संस्थाएँ पौधों के रोपण व संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएँगी। साथ ही “अंकुर” या इसी प्रकार के एक राष्ट्रीय मंच की स्थापना का सुझाव दिया गया, जहाँ नागरिक जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य अवसरों पर पौधे लगवाने के लिए पंजीकरण कर सकें। महानगरों में रहने वाले लोग निश्चित राशि देकर अपने नाम से पौधा लगवा सकें और उन्हें उसकी जानकारी व फोटो उपलब्ध कराई जाए।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह संकल्प 19 फरवरी 2021 को अमरकंटक में नर्मदा जयंती के अवसर पर लिया गया था। तब से अब तक वे प्रतिदिन कम से कम एक पौधा लगाते रहे हैं और पाँच वर्षों में छह हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। कोविड-19 महामारी और सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बावजूद यह क्रम निरंतर जारी रहा।
साध्वी दीदी माँ ऋतंभरा ने अपने संबोधन में वृक्षारोपण को धर्म, संस्कृति और धरती की रक्षा का सच्चा यज्ञ बताया। उन्होंने कहा कि शुभ अवसरों पर पौधारोपण की परंपरा समाज को स्थायी सकारात्मक दिशा दे सकती है।
पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान का यह प्रयास केवल एक मंत्री का नहीं, बल्कि प्रकृति के साधक का कार्य है। उन्होंने इसे सकारात्मक जनआंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि पर्यावरण संरक्षण को राजनीतिक प्राथमिकताओं के केंद्र में लाने की आवश्यकता है।
वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष झा ने कहा कि पेड़ केवल हरियाली नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाला माध्यम हैं। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति लगाव बढ़ाने और पौधारोपण को जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, साधना सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। समापन अवसर पर उपस्थितजनों ने सामूहिक रूप से पौधारोपण का संकल्प लिया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि देश की विशाल जनसंख्या में से कुछ करोड़ लोग भी नियमित रूप से पौधारोपण का संकल्प लें तो भारत विश्व के लिए पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बन सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने स्तर पर प्रतिदिन, प्रतिमाह या विशेष अवसरों पर पौधे लगाने का संकल्प लेकर इस अभियान को जनभागीदारी का महाअभियान बनाएँ।
