पहले बजट से लेकर अब तक बदल गए आयकर के नियम, जाने बजट में आयकर का इतिहास

 पहले बजट से लेकर अब तक बदल गए आयकर के नियम, जाने बजट में आयकर का इतिहास
Nimmi Thakur 
नई दिल्ली। देश का पहला बजट 16 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसे देश के पहले वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था। आजादी के समय देश में 1500 रुपये तक की आमदनी टैक्स फ्री थी। उसके बाद आयकर व्यवस्था में कई बदलाव किए गए। सरकार की आमदनी का एक हिस्सा इनकम टैक्स यानी आयकर से आता है। यह टैक्स देश के लोगों को अपनी कमाई से सरकार को देनी पड़ता है। आजादी के समय देश में 1500 रुपये तक की आमदनी ही टैक्स फ्री थी। उसके बाद आयकर व्यवस्था में समय-समय पर कई बदलाव किए गए।
देश में एक समय ऐसा भी था जब बच्चों की संख्या के आधार पर किसी व्यक्ति को कितना टैक्स देना पड़ेगा, यह तय होता था। देश में आयकर का इतिहास कई और मायनों में भी दिलचस्प रहा है। आइए जानते हैं आजादी के बाद कितना बदला है आयकर।
12 लाख 75 हजार तक की आमदनी टैक्स फ्री
केंद्रीय बजट 2025-26 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से किए गए एलानों के बाद अगर किसी नौकरीपेशा करदाता की सालाना आय 12 लाख 75 हजार रुपये तक है, उसे नई टैक्स रिजीम के तहत उन्हें आयकर नहीं चुकाना पड़ता। क्योंकि स्टैंडर्ड डिडक्शन के 75,000 रुपये घटाने के बाद उसकी आमदनी 12 लाख रुपये रह जाती है, और इस राशि को आयकर की देनदारी से बाहर रखा गया है। इसका मतलब है अगर किसी व्यक्ति का मासिक वेतन एक लाख रुपये के आसपास है तो उसे नई कर प्रणाली में कोई आयकर चुकाने की जरूरत नहीं है।
कुंवारों के लिए था अलग-अलग टैक्स का प्रावधान
1955 में जनसंख्या बढ़ाने के लिए पहली बार देश में शादीशुदा और कुंवारों के लिए अलग-अलग टैक्स फ्री इनकम रखी गई। इसके तहत शादीशुदा लोगों को 2000 रुपये तक की आमदनी तक कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था। वहीं, कुंवारों के लिए यह लिमिट 1000 रुपये ही थी।
आबादी बढ़ाने पर छूट देने वाला पहला देश भारत
भारत 1958 में बच्चों की संख्या के आधार पर इनकम टैक्स में छूट देने वाला दुनिया का इकलौता देश बना। शादीशुदा होने पर यदि बच्चा नहीं है तो 3000 रुपये तक की आय पर टैक्स नहीं देना पड़ता था। लेकिन, एक बच्चे वाले व्यक्तियों के लिए 3300 रुपये और 2 बच्चों पर 3600 रुपये की आय टैक्स फ्री थी।